छिंदवाड़ा की घटना के बाद इंदौर में प्रशासन हरकत में आ गया है
कलेक्टर शिवम वर्मा ने जहरीले और प्रतिबंधित कफ सिरप के मामले में सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा कि यदि कोई डॉक्टर प्रतिबंधित ड्रग्स वाली कफ सिरप लिखते पकड़ा गया तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सीधे जेल भेजा जाएगा। उन्होंने सीएमएचओ, फूड एंड ड्रग विभाग और ड्रग इंस्पेक्टरों को आदेश दिया है कि दवा बाजार, मेडिकल स्टोर और बाल रोग अस्पतालों में निगरानी बढ़ाई जाए। मंगलवार से विशेष जांच अभियान शुरू हो गया है, जिसके तहत प्रशासन की टीमें जगह-जगह कफ सिरप के नमूने एकत्र कर जांच के लिए भेजेंगी।
कलेक्टर ने बताया कि जिस जहरीले कफ सिरप से छिंदवाड़ा में बच्चों की मौत हुई, उसकी सप्लाई इंदौर में नहीं हुई है। बावजूद इसके, जिले में प्रतिबंधित और मिलती-जुलती सिरप की बिक्री रोकने के लिए सघन जांच की जा रही है। कोल्ड्रिफ कफ सिरप की बिक्री पहले ही प्रतिबंधित की जा चुकी है, और अगर कोई डॉक्टर इसे लिखता या कोई केमिस्ट बेचता पाया गया तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।#इंदौर #कफसिरप #प्रतिबंधितदवा #कलेक्टरशिवमवर्मा #ड्रगकंट्रोल #छिंदवाड़ाघटना #स्वास्थ्यविभाग #जेएसएआई #जनस्वास्थ्यअभियान #एमपीसमाचार #मध्यप्रदेश #दवाजांच #पब्लिकहेल्थ
इस बीच, जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया (JSAI) ने केंद्र सरकार से देशभर में कफ सिरप के निर्माण, बिक्री और विपणन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है। संगठन ने राजस्थान और मध्य प्रदेश में जहरीले सिरप से हुई बच्चों की मौतों पर चिंता जताई है और दवा नियामक प्रणाली को और मजबूत करने की अपील की है।
इंदौर प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे बच्चों को कोई भी कफ सिरप देने से पहले डॉक्टर की सलाह लें और दवा खरीदते समय उसके लेबल और निर्माता कंपनी की जानकारी अवश्य जांचें। साथ ही, यदि किसी मेडिकल स्टोर पर संदिग्ध या बिना बिल की दवा मिलती है, तो उसकी सूचना तुरंत स्वास्थ्य विभाग को दें ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
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