इंदौर: गठिया (Arthritis) एक आम लेकिन गंभीर बीमारी है, जो शरीर के जोड़ों को प्रभावित करती है। इसके दो प्रमुख प्रकार हैं – ऑस्टियोआर्थराइटिस और रूमेटाइड आर्थराइटिस। ऑस्टियोआर्थराइटिस आमतौर पर उम्र बढ़ने के साथ होता है, जबकि रूमेटाइड आर्थराइटिस एक ऑटोइम्यून रोग है, जो कई बार आनुवांशिक कारणों से भी उत्पन्न हो सकता है।
मेदांता अस्पताल, इंदौर के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अविनाश मंडलोई के अनुसार, ऑस्टियोआर्थराइटिस खासतौर पर घुटनों में पाया जाता है। उम्र के साथ जोड़ों की हड्डियाँ घिसने और कमजोर पड़ने लगती हैं, जिससे चलने-फिरने में कठिनाई, सीढ़ियाँ चढ़ते समय दर्द और जोड़ों का टेढ़ापन जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
शुरूआती अवस्था में दवाइयाँ और व्यायाम काफी प्रभावी होते हैं, लेकिन यदि दर्द बढ़ जाए और राहत न मिले तो सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है। डॉ. मंडलोई ने बताया कि मेदांता अस्पताल में गठिया रोगियों के लिए उन्नत जांच, फिजियोथेरेपी और आधुनिक उपचार सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिनसे अनेक मरीज लाभान्वित हो रहे हैं।
रोबोटिक सर्जरी से तेज सुधार
हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिश गर्ग ने बताया कि अब गठिया के इलाज में आधुनिक तकनीक का उपयोग बढ़ रहा है और रोबोटिक सर्जरी इस दिशा में एक बड़ा नवाचार है। यह सर्जरी अधिक सटीक होती है और मरीज की रिकवरी भी तेजी से होती है। अब ऐसे इम्प्लांट भी उपलब्ध हैं जो करीब 25 साल तक टिकाऊ रहते हैं। इसमें केवल 5 मिमी तक की हड्डी निकालकर इम्प्लांट लगाया जाता है, जबकि पहले यह 10 मिमी तक हटानी पड़ती थी। यह प्रक्रिया शरीर पर कम असर डालती है और मरीज जल्दी सामान्य जीवन में लौट सकता है।
महिलाओं में अधिक रूमेटाइड आर्थराइटिस
विशेषज्ञों के अनुसार, रूमेटाइड आर्थराइटिस का प्रभाव महिलाओं में अधिक देखा जाता है। इसके लक्षणों में सुबह के समय जोड़ों में अकड़न, सूजन, गर्माहट और लालिमा शामिल हैं। यदि समय रहते इसका इलाज शुरू कर दिया जाए, तो जोड़ों को स्थायी रूप से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है।
गठिया से बचाव के उपाय
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कैल्शियम और प्रोटीन से भरपूर संतुलित आहार लें।
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नियमित योग, प्राणायाम और हल्का व्यायाम करें।
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धूप में कुछ समय बिताएं ताकि शरीर को पर्याप्त विटामिन D मिल सके।
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केवल RO का पानी न पीएं, उसका TDS स्तर अवश्य जांचें।
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वजन नियंत्रित रखें और लंबे समय तक एक ही अवस्था में बैठे रहने से बचें।
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