इंदौर में बढ़ते निर्माण कार्य, खुदी सड़कों और उड़ती धूल ने वायु गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है। शहर का AQI लगातार 100 के पार बना हुआ है, जिससे हवा में PM 2.5 और PM 10 का स्तर खतरनाक सीमा तक पहुंच गया है। प्रदूषित हवा के कारण अस्पतालों में सांस, एलर्जी, खांसी और दमे के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि नवंबर से जनवरी के बीच हवा का प्रवाह कम होने और कोहरे व बादलों की स्थिति रहने से जहरीले कण निचले स्तर पर बने रहते हैं, जिससे प्रदूषण और बढ़ जाता है।
शहर में निर्माण गतिविधियों के दौरान डस्ट-कंट्रोल के अपर्याप्त इंतजाम, बढ़ती ट्रैफिक जाम की समस्या और वाहनों की नियमित जांच न होने की वजह से धूल और धुआं हवा में लगातार मिल रहा है। कई सरकारी और निजी वाहनों से निकलने वाले काले धुएं पर भी प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है, जिससे प्रदूषण का स्तर और बढ़ रहा है। हालांकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि इंदौर की स्थिति देश के कई बड़े शहरों की तुलना में बेहतर है और मौसम में बदलाव के साथ अगले एक-दो माह में सुधार देखने को मिल सकता है।
पिछले दस दिनों में शहर का AQI 100 से ऊपर दर्ज किया गया है, जबकि कई क्षेत्रों में यह 250 से भी अधिक पहुंच गया है। रीगल तिराहे पर AQI 261 तक दर्ज किया गया, जो पीक आवर्स में और बढ़ जाता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि सुरक्षित स्तर AQI 100 से कम होना चाहिए, जबकि PM 2.5 का स्तर 25 और PM 10 का 60 के भीतर होना चाहिए, लेकिन मौजूदा आंकड़े इनसे कई गुना अधिक हैं।
वहीं दूसरी ओर, वायु प्रदूषण का सीधा असर स्वास्थ्य पर दिख रहा है। अस्पतालों में खांसी, एलर्जी, निमोनिया और सांस संबंधित बीमारियों के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ठंड के मौसम में भारी हवा के कारण धूल और धुएं के कण नीचे रह जाते हैं, जिससे श्वसन समस्या बढ़ती है। विशेषज्ञों ने लोगों को मास्क पहनने, धूल भरे इलाकों से बचने और एलर्जी के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
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