इंदौर। भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से हुई त्रासदी का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। अब तक 23 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि तीन मरीज अभी भी जीवन और मृत्यु के बीच झूलते हुए वेंटिलेटर पर संघर्ष कर रहे हैं। सैकड़ों लोग इस दूषित जल के सेवन से बीमार पड़ चुके हैं और अस्पतालों में इलाज करा चुके हैं। इस भयावह घटना के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ है और भागीरथपुरा में नर्मदा जलापूर्ति व ड्रेनेज व्यवस्था का काम युद्धस्तर पर शुरू किया गया है।
नर्मदा पाइपलाइन और ड्रेनेज का काम जोरों पर
भागीरथपुरा टंकी के निकट स्थित गार्डन और पुलिस चौकी के सामने की सड़क पर नर्मदा पाइपलाइन बिछाने का काम तेजी से चल रहा है। जेसीबी मशीनों से सड़कें खोदी जा रही हैं और पाइप लाइनें बिछाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। कार्यस्थल पर मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि स्वच्छ पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए यह काम प्राथमिकता से किया जा रहा है।
भागीरथपुरा के भीतरी इलाकों में भी ड्रेनेज और नर्मदा पाइपलाइन का काम चल रहा है। एक चाय की दुकान के सामने से गुजरने वाली सड़क पर जेसीबी से खुदाई कर पाइपलाइन बिछाई गई है और अब उसे भरने का काम प्रगति पर है। इस कारण यहां आवागमन लगभग ठप हो गया है और स्थानीय लोग गलियों के रास्ते आना-जाना कर रहे हैं।
आयुष्मान आरोग्य मंदिर के सामने भी पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा किया जा चुका है। हालांकि, इन निर्माण कार्यों के कारण सड़कें उबड़-खाबड़ हो गई हैं, जगह-जगह कीचड़ फैला हुआ है, जिससे दोपहिया वाहन चालकों और पैदल यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। फिर भी, स्थानीय निवासियों को उम्मीद है कि यह काम पूरा होने के बाद उन्हें इस तरह की त्रासदी से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी।
हाईकोर्ट में आज पांच याचिकाओं पर सुनवाई
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में आज 15 जनवरी को दूषित पेयजल से जुड़ी पांच याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई होनी है। पिछली सुनवाई में अदालत ने राज्य सरकार के जवाब को असंवेदनशील करार देते हुए कड़ी फटकार लगाई थी।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा था कि इस घटना ने देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचाने जाने वाले इंदौर की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। न्यायालय ने रेखांकित किया था कि स्वच्छ पेयजल केवल इंदौर के नागरिकों का ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मध्य प्रदेश के नागरिकों का संवैधानिक और मौलिक अधिकार है।
अदालत ने चेतावनी दी थी कि यदि आवश्यकता पड़ी तो दोषी अधिकारियों पर सिविल और आपराधिक दायित्व तय किया जाएगा। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया था कि यदि पीड़ित परिवारों को पर्याप्त मुआवजा नहीं मिला है, तो इस संबंध में भी निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
गौरतलब है कि पिछली सुनवाई के समय मौतों की संख्या 18 थी, जो अब बढ़कर 23 हो गई है। वर्तमान में तीन मरीज वेंटिलेटर पर जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
27 मरीज अभी भी अस्पताल में भर्ती, 8 आईसीयू में
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी नवीनतम बुलेटिन के अनुसार, बुधवार को इंडेक्स आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के सहयोग से एक स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया। शिविर में डायरिया से पीड़ित एक मरीज मिला, जिसे तत्काल भागीरथपुरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया।
इसी दिन भागीरथपुरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर डायरिया की शिकायत लेकर तीन और मरीज पहुंचे, जिनका वहीं पर उपचार किया गया। वर्तमान में विभिन्न अस्पतालों में कुल 27 मरीज भर्ती हैं, जिनमें से आठ मरीजों का आईसीयू में गहन उपचार चल रहा है और तीन मरीज वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि सभी मरीजों की स्थिति पर बारीकी से निगरानी रखी जा रही है और उन्हें सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। क्षेत्र में निगरानी जारी है और किसी भी नए मामले की रिपोर्टिंग के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।
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