इंदौर : इंडोकॉन 2026 के समापन दिवस पर हिप सर्जरी से जुड़ी जटिलताओं और चुनौतियों पर गहन चर्चा हुई। पेरीप्रोस्थेटिक फ्रैक्चर, रिविजन सर्जरी, इम्प्लांट की विफलता और हड्डी की गुणवत्ता जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए।
मुख्य सत्रों की झलकियां
कॉन्फ्रेंस चेयरमैन डॉ. हेमंत मंडोवरा ने बताया कि इंडोकॉन 2026 सत्रों में पेरी-इम्प्लांट फ्रैक्चर की पहचान, बार-बार होने वाले डिसलोकेशन, सीमेंटेड हिप रिप्लेसमेंट की तकनीकी बारीकियों और रिविजन सर्जरी पर व्यापक चर्चा हुई।
विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि हिप सर्जरी में जटिलताएं अचानक सामने आ सकती हैं, जो पहले से मौजूद मेडिकल स्थितियों के कारण और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती हैं।
डॉ. डी.डी. तन्ना को मिला एनएचसी-इंडोकॉन ओरेशन सम्मान

इंडोकॉन 2026 का आकर्षण वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. डी.डी. तन्ना को दिया गया एनएचसी-इंडोकॉन ओरेशन सम्मान रहा। डॉ. डी.के. तनेजा की उपस्थिति में आयोजन समिति ने उन्हें सम्मानित किया।
अपने ओरेशन व्याख्यान में डॉ. तन्ना ने 1954 से लेकर आज तक ऑर्थोपेडिक सर्जरी की यात्रा को ऐतिहासिक संदर्भ में प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि शुरुआती दशकों में आधुनिक मशीनों, स्कैनर या उन्नत उपकरणों की अनुपस्थिति में उपचार पूरी तरह सर्जन की क्लिनिकल समझ और बुनियादी साधनों पर निर्भर था।
40 से अधिक वर्षों के अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि इस अवधि में ऑर्थोपेडिक सर्जरी में आई प्रगति पूरी पीढ़ी के समर्पित प्रयासों का परिणाम है।
कॉन्फ्रेंस सेक्रेटरी डॉ. अर्जुन जैन ने डॉ. तन्ना के संबोधन को ऑर्थोपेडिक सर्जनों के लिए प्रेरणादायक बताया।
विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
डॉ. जॉन मुखोपाध्याय ने पेरीप्रोस्थेटिक फ्रैक्चर पर अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि हिप रिप्लेसमेंट के बाद होने वाला यह फ्रैक्चर अत्यंत जटिल होता है। उपचार से पहले फ्रैक्चर के प्रकार, हड्डी की मजबूती, इम्प्लांट की स्थिति और मरीज के संपूर्ण स्वास्थ्य का मूल्यांकन जरूरी है।
एम्स दिल्ली के पूर्व प्रमुख और ट्रॉमा सेंटर के निदेशक रहे डॉ. राजेश मल्होत्रा ने हिप सर्जरी से पहले और बाद की सावधानियों पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि डायबिटिक मरीजों की सर्जरी तभी करनी चाहिए जब उनका शुगर लेवल पूरी तरह नियंत्रित हो।
मरीजों को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के बाद कुछ सप्ताह तक धूम्रपान और शराब से पूरी तरह परहेज करना चाहिए, क्योंकि ये हीलिंग को धीमा कर संक्रमण का खतरा बढ़ाते हैं। उन्होंने बताया कि सही तैयारी के साथ युवा मरीज न केवल सामान्य जीवन में लौटते हैं बल्कि खेल और आउटडोर गतिविधियों में भी सुरक्षित रूप से वापस आ सकते हैं।
तीन दिवसीय सम्मेलन की उपलब्धियां
कोर्स कन्वेनर डॉ. अभिजीत पंडित ने बताया कि इंडोकॉन 2026 के तीन दिवसीय कार्यक्रम ने हिप सर्जरी के विभिन्न पहलुओं—फ्रैक्चर प्रबंधन, संक्रमण नियंत्रण, पेरीप्रोस्थेटिक जटिलताओं, आधुनिक तकनीक, 3D प्रक्रियाओं और स्किल-लैब प्रशिक्षण—को एक मंच पर लाया। देशभर से आए सर्जनों को आधुनिक उपचार पद्धतियों और तकनीक के प्रभावी उपयोग की गहरी समझ मिली।
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