इंदौर: 2026 के तीसरे दिन इंदौर ने चिकित्सा विज्ञान का भविष्य रचा, जहां एआई और मानवीय अनुभव मिलकर इलाज की नई परिभाषा गढ़ रहे थे। ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर के हर हॉल में डॉक्टर, सर्जन और शोधकर्ता सक्रिय थे। रोबोटिक सर्जरी, मशीन लर्निंग से बीमारी की जल्दी पहचान और डेटा एनालिटिक्स पर चर्चाएं जोरों पर रहीं। देश-विदेश के विशेषज्ञों ने कहा कि आने वाला दशक चिकित्सा को कला और तकनीक का संगम बनेगा। यूसीकॉन का तीसरा दिन इसी ‘फ्यूचर रेडी यूरोलॉजी’ को समर्पित रहा।
एडवांस्ड सेशन्स, केस स्टडीज और टेक्निकल डेमो ने माहौल को अकादमिक ऊंचाई दी। बड़े स्क्रीनों पर जटिल सर्जरी की बारीकियां, रोबोटिक आर्म्स की सटीकता और लेजर-मिनिमली इनवेसिव तकनीकों से मरीजों को कम दर्द, कम रक्तस्राव व तेज रिकवरी के फायदे दिखाए गए। युवा डॉक्टरों ने लाइव सर्जरी देखकर सीखा कि एआई से सर्जरी प्लानिंग अधिक सटीक हो रही है, जिससे ऑपरेशन समय घट रहा और सफलता दर बढ़ रही है।
3डी प्रिंटिंग पर विशेष चर्चा ने उत्साह बढ़ाया। विशेषज्ञों ने बताया कि यह तकनीक मेडिकल इंस्ट्रूमेंट्स, इम्प्लांट्स और सर्जरी मॉडल तैयार करने में क्रांति ला रही है। हालांकि महंगी, इसकी कस्टमाइजेशन और सटीकता सर्जन को मरीज की शारीरिक संरचना पहले ही समझा देती है—सर्जरी समय कम, जटिलताएं घटती हैं और रिकवरी बेहतर होती है। भविष्य में यह मरीज-विशिष्ट पार्ट्स बनाएगी, जो ‘फ्यूचर मेडिसिन’ का अभिन्न अंग बनेगी।
दिन का चरम रहा अमेरिका के विश्वप्रसिद्ध यूरोलॉजिस्ट डॉ. महेंद्र भंडारी का कीनोट। हॉल खचाऊ था। उन्होंने ‘स्मार्ट सर्जरी’ पर जोर दिया, जहां एआई डॉक्टर का सहयोगी बनेगा। “तकनीक डॉक्टर की जगह नहीं लेगी, बल्कि उसे सशक्त बनाएगी,” उन्होंने कहा। डेटा-आधारित निर्णय, रोबोटिक प्रिसिजन और ह्यूमन टच से मरीजों को बेहतर जीवन मिलेगा। भारत जैसे देशों में यह गेम-चेंजर साबित होगी।
वैज्ञानिक सत्रों के बीच जन जागरूकता पर फोकस रहा। विशेषज्ञों ने प्रोस्टेट समस्या, किडनी स्टोन, यूरिनरी इंफेक्शन, ब्लैडर-किडनी कैंसर पर चेताया। लक्षण जैसे पेशाब में जलन-खून, बार-बार पेशाब, कमर-पेट दर्द, रात में बार-बार उठना या रुक-रुक कर पेशाब को नजरअंदाज न करें। समय पर जांच से इलाज आसान-कम खर्चीला। अपील: ज्यादा पानी पिएं, व्यायाम करें, जंक फूड-तंबाकू छोड़ें, 40+ उम्र में नियमित चेकअप कराएं।
शाम को ‘सचेत-परंपरा’ की दो घंटे की संगीतमय प्रस्तुति ने वैज्ञानिक माहौल को उत्सव में बदल दिया। डॉक्टर धुनों पर झूमे। मेहमानों ने कहा, इंदौर ने ज्ञान, आत्मीयता और मनोरंजन का अनमोल संगम दिया।
ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. सुशील भाटिया बोले, “तीसरा दिन भविष्य चिकित्सा का था। एआई-रोबोटिक्स इलाज बदल देंगी। इंदौर मेडिकल इनोवेशन हब बन रहा है।”
चेयरमैन डॉ. संजय शिंदे ने कहा, “हम डॉक्टरों को दिशा दे रहे हैं ताकि स्वास्थ्य सेवाएं मानवीय व सुलभ हों। तकनीक+संवेदनशीलता ही असली इलाज है।”
ट्रेजरर डॉ. नितीश पाटीदार बोले, “अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी व विश्वस्तरीय सत्र इंदौर की मेडिकल क्षमता दर्शाते हैं। इससे मेडिकल टूरिज्म को बल मिलेगा।”
को-ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. रवि नागर ने कहा, “सत्र प्रैक्टिकल हैं, ताकि तकनीक छोटे शहरों-ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचे।”
को-चेयरमैन डॉ. श्याम अग्रवाल बोले, “तकनीक से ज्यादा जागरूकता जरूरी। शुरुआती लक्षण पहचानें, तो यूरोलॉजी बीमारियां आसानी से ठीक।”
चौथे दिन (1 फरवरी) इंदौर मैराथन के साथ ‘Pass the Baton of Life’ रन होगा—ऑर्गन डोनेशन व स्वस्थ जीवन पर। यूरोपियन बोर्ड एग्जाम व शैक्षणिक सत्र भी। अंतिम दिन ‘फिटनेस, सेवा, सामाजिक जिम्मेदारी’ पर केंद्रित।
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