इंदौर। शहर के शैक्षणिक संस्थान डेली कॉलेज पर गंभीर आरोप लगे हैं। एक छात्रा के माता-पिता ने आरोप लगाया है कि स्कूल प्रबंधन ने उनकी बेटी की शिकायतों को नजरअंदाज किया और उसे बदनाम करने का प्रयास किया, जिसके चलते छात्रा को हेड गर्ल का पद छोड़कर इस्तीफा देना पड़ा।
क्या है पूरा मामला
निया बाहेती, जो जुलाई 2025 में छात्रों के वोट से हेड गर्ल चुनी गई थीं, को कथित तौर पर कुछ सहपाठियों और शिक्षकों के दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा। निया का स्कूल में शानदार रिकॉर्ड रहा है – उन्हें ऑल राउंडर ट्रॉफी और बेस्ट ओवरऑल स्टूडेंट का सम्मान मिला था।
परिवार का आरोप है कि जब निया ने बार-बार शिकायत की, तो प्रिंसिपल ने उन्हें “दुर्व्यवहार को नजरअंदाज करने” और “मुस्कुराकर भूल जाने” की सलाह दी। मामला तब और गंभीर हो गया जब फैकल्टी सदस्य सुश्री अदिति घटक ने कथित तौर पर स्कूल कार्यक्रमों में मिसमैनेजमेंट के बारे में चिंता जताने के बाद निया को ताने मारे।
बिना जांच के लगाए गए आरोप
माता-पिता का सबसे गंभीर आरोप यह है कि बिना किसी मेडिकल जांच या असेसमेंट के स्कूल में निया को “मानसिक रूप से अस्थिर” बताया जाने लगा। परिवार का कहना है कि यह लापरवाही से लेबलिंग की गई, जिससे मूल शिकायतों से ध्यान हट गया।
निया के पिता अपूर्व बाहेती ने कहा, ” मेरी बेटी को योग्यता के आधार पर हेड गर्ल चुना गया था, फिर भी जब उसने वास्तविक चिंताएं जताईं, तो प्रबंधन ने उन पर ध्यान देने के बजाय उसे बदनाम करना चुना। बिना किसी मेडिकल आधार के किसी बच्चे को लापरवाही से ‘मानसिक रूप से अस्थिर’ कहना न केवल मानहानिकारक है, बल्कि बेहद गैर-जिम्मेदाराना भी है।”
नोटिस का नहीं मिला जवाब
बाहेती परिवार ने स्कूल, प्रिंसिपल और शिक्षकों को औपचारिक नोटिस भेजा था, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। परिवार इसे जानबूझकर की गई चुप्पी और जवाबदेही की कमी मानता है।
कानूनी कार्रवाई की तैयारी
बाहेती ने बताया कि वे कानूनी और नियामक उपायों पर विचार कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह मुद्दा सिर्फ एक बच्चे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बारे में जरूरी सवाल उठाता है कि स्कूल शिकायतों को कैसे संभालते हैं, छात्रों की गरिमा की रक्षा कैसे करते हैं, और अपनी नैतिक जिम्मेदारी कैसे निभाते हैं।
“शैक्षणिक संस्थान माता-पिता की जगह लेते हैं। डेली कॉलेज का व्यवहार इस जिम्मेदारी के प्रति चौंकाने वाली लापरवाही दिखाता है। बच्चों की भलाई की कीमत पर संस्थान की प्रतिष्ठा नहीं बचाई जा सकती,” बाहेती ने कहा।
फिलहाल स्कूल प्रबंधन की ओर से इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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