बीआरटीएस रैलिंग हटाकर शिवाजी वाटिका से एलआईजी चौराहा तक 6 किमी लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर के खिलाफ दायर याचिका पर गुरुवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने फिलहाल प्रोजेक्ट रोकने से इनकार कर दिया। अब 25 फरवरी को यह मामला बीआरटीएस समस्याओं से जुड़ी पहले से लंबित याचिका के साथ सुना जाएगा।
इधर, एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण शुरू हो चुका है। एलआईजी से एमआर-9 चौराहे तक पतरे लगाए जा चुके हैं और 15 फरवरी के बाद काम में तेजी लाने की योजना है। याचिका में मांग की गई है कि पूरे 6 किमी में एकसमान कॉरिडोर के बजाय चौराहों पर छोटे ब्रिज बनाए जाएं।
350 करोड़ का खर्च, सिर्फ 15% वाहनों को फायदा?
याचिकाकर्ता का दावा है कि फिजिबिलिटी सर्वे में कॉरिडोर की उपयोगिता मात्र 15% पाई गई। ऐसे कम उपयोगी प्रोजेक्ट पर 350 करोड़ रुपये खर्च करना उचित नहीं। उनका कहना है कि यह सुविधा केवल शिवाजी वाटिका से विजय नगर जाने वाले वाहनों को मिलेगी। गीताभवन चौराहे पर उतरकर एमजी रोड, मधुमिलन या गीताभवन की ओर जाने वाले चालकों को इसका कोई लाभ नहीं होगा।
मेट्रो ट्रैक के साथ एलिवेटेड कॉरिडोर: 2 साल लगेंगे
गुरुवार को संभागायुक्त सुदामा खाड़े की अध्यक्षता में पीडब्ल्यूडी, मेट्रो और नगर निगम के अधिकारियों की बैठक हुई। विकल्प रिपोर्ट पर चर्चा के दौरान एलिवेटेड कॉरिडोर के साथ मेट्रो ट्रैक, लंबाई-चौड़ाई बढ़ाने और एलिवेटेड रोटरी जैसे प्रस्ताव आए। इन पर 7 फरवरी को जनप्रतिनिधियों से चर्चा होगी। अधिकारियों ने 2 साल की समयसीमा तय की है। मेट्रो पक्ष ने बताया कि यह मोबिलिटी प्लान में शामिल नहीं। यदि शामिल करना हो तो सर्वे, डीपीआर और निर्माण मेट्रो कॉर्पोरेशन ही करेगा—पीडब्ल्यूडी नहीं।
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