यह यात्रा सांयकाल 4 बजे जगन्नाथ मंदिर से शुरू हुई और किशनगंज स्थित माँ कालिका मंदिर तक पहुंची। महाप्रभु जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र, और बहन सुभद्रा को सुंदर सुसज्जित रथ पर विराजमान किया गया। रथ और मंदिर दोनों को विभिन्न प्रकार के पुष्पों और 21 पताकाओं से अलंकृत किया गया, जो दर्शकों के लिए एक आकर्षक दृश्य प्रस्तुत कर रहा था।

परंपरा का निर्वहन करते हुए, मंदिर के मुख्य ट्रस्टी डॉ. अशोक मोहन्ती ने यात्रा से पहले स्वर्ण झाड़ू से रथ की सफाई की। यात्रा में कई विशेष आकर्षण थे, जिनमें महादेव का रूप, विशाल हनुमान जी की मूर्ति, 25 डमरू वादकों का समूह, और भक्ति गीत गाते बैंड-बाजे शामिल थे। इन सभी तत्वों ने यात्रा की भव्यता को कई गुना बढ़ा दिया।
यात्रा मार्ग पर भक्तों ने सेवा भाव दिखाते हुए जल, फल, चाय, और फलाहार के वितरण की व्यवस्था की थी। सुरक्षा के लिए पुलिस बल और स्वयंसेवकों का विशेष प्रबंध किया गया था, जिसने यात्रा के सुचारू संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस वर्ष की रथयात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव :
7 जुलाई को मुख्य रथयात्रा संपन्न हुई, 7 से 14 जुलाई तक महाप्रभु जगन्नाथ माँ कालिका मंदिर में विराजमान रहेंगे, और 15 जुलाई, 2024 (सोमवार) को बाहुड़ा यात्रा या वापसी यात्रा आयोजित की जाएगी।
मंदिर के मुख्य ट्रस्टी डॉ. अशोक मोहन्ती और मुख्य पुजारी पंडित रासबिहारी पंडा ने सभी भक्तों, स्थानीय समुदाय और सहयोगी विभागों का हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि 15 जुलाई की बाहुड़ा यात्रा भी इसी उत्साह और भक्तिभाव के साथ संपन्न होगी।
इस भव्य आयोजन ने न केवल स्थानीय समुदाय को एकजुट किया, बल्कि पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्सव का माहौल भी बना दिया। जगन्नाथ रथयात्रा 2024 ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यह भारतीय संस्कृति और परंपरा का एक अभिन्न अंग है।