इंदौर: रेसकोर्स रोड स्थित लाभमंडपम सभागार में रविवार को आयोजित संगीतमय कार्यक्रम “नादब्रह्म – सप्तरंगी स्वर लहरियां (भाग 12)” ने शहर के संगीत प्रेमियों को यादगार अनुभव दिया। ‘गोल्डन बीट्स’ थीम पर सजी इस शाम में सुरों और तालियों की गूंज देर तक सुनाई देती रही। कार्यक्रम की शुरुआत भक्ति रचनाओं—‘हर हर शम्भो’, ‘देवा श्रीगणेशा’, ‘मंगल भवन अमंगल हारी’ और ‘हम कथा सुनाते राम’—से हुई, जिसने माहौल को आध्यात्मिक बना दिया। इसके बाद प्रस्तुतियों की श्रृंखला ने श्रोताओं को बांधे रखा।
कार्यक्रम में ‘रोशन तुम्हीं से दुनिया’, ‘लता जी मेडले’, ‘सांसों की जरूरत है’, ‘माना हो तुम बेहद हंसी’, ‘मोहे रंग दो लाल’, ‘डोली तारो ढोल बाजे’, ‘क्या यही प्यार है’, ‘पिया तोसे नैना लागे रे’, ‘दिल तड़प तड़प के कह रहा है’, ‘मधुबन में राधिका नाचे रे’ और ‘ज़ूबी डूबी’ जैसे गीतों ने समां बांध दिया। खास आकर्षण ‘डांस एंड ड्रम ब्लास्ट’ रहा, जिसमें जोशीले गीतों और कव्वाली प्रस्तुतियों ने दर्शकों से खूब वाहवाही बटोरी।

इस शाम में शहर के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिष्ठित लोगों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। चिकित्सा क्षेत्र से डॉ. अमिताभ गोयल, डॉ. संजय भटनागर, डॉ. मिताली श्रीमाल और डॉ. सुरेखा सोनी ने अपनी गायकी से सभी को प्रभावित किया। वहीं व्यवसाय जगत से आशुतोष कडेल, मयंक खंडेलवाल और नरेश शुक्ला ने भी अपनी मधुर आवाज से माहौल को सुरमय बना दिया। आशा निसरगंध की विशेष प्रस्तुति और स्वरांश टीम के कोरस ने कार्यक्रम में अतिरिक्त मिठास घोली। संचालन ममता मेहता ने किया, जबकि गीत संयोजन दीपेश जैन और उनकी टीम द्वारा किया गया।
संयोजिका ममता मेहता ने कहा, “नादब्रह्म का 12वां संस्करण हमारे लिए गर्व का विषय है। ‘गोल्डन बीट्स’ के जरिए हमने उन सदाबहार गीतों को फिर जीवंत किया, जो वर्षों से श्रोताओं के दिलों में बसे हैं। इंदौरवासियों का उत्साह और स्नेह हमारे लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है। यह सिर्फ एक संगीत संध्या नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक एकता का उत्सव भी है।”
कार्यक्रम के दौरान दर्शकों ने हर प्रस्तुति का भरपूर आनंद लिया और तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
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