- कांग्रेस पार्षद को सदन से किया बाहर, बहुमत से पारित हुआ 8,455 करोड़ का बजट
इंदौर। इंदौर नगर निगम की मंगलवार को हुई बजट बैठक उस समय विवादों में घिर गई, जब कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम ने ‘वंदे मातरम’ गाने से इनकार कर दिया। इस घटना के बाद सदन में जमकर हंगामा हुआ और बैठक की कार्यवाही बाधित हो गई। अंततः सभापति मुन्नालाल यादव ने बहुमत के आधार पर 8 हजार 455 करोड़ रुपए का बजट पारित घोषित किया।
सदन में भड़की भाजपा, सभापति को करना पड़ा हस्तक्षेप
बजट पर चर्चा के दौरान जैसे ही फौजिया शेख अलीम ने ‘वंदे मातरम’ गाने से मना किया, भाजपा पार्षद तत्काल अपनी सीटों से उठ खड़े हुए और सभापति के आसन की ओर बढ़ गए। देखते ही देखते सदन में नारेबाजी और शोर-शराबा शुरू हो गया, जिससे कार्यवाही पूरी तरह ठप हो गई।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सभापति मुन्नालाल यादव को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने फौजिया शेख अलीम को सदन से बाहर जाने के निर्देश दिए। सभापति ने बाद में मीडिया से कहा कि “‘वंदे मातरम’ के संबंध में अमर्यादित शब्दों का प्रयोग करना सर्वथा अनुचित है, इसीलिए संबंधित पार्षद को सदन से बाहर किया गया।”
फौजिया बोलीं — किस कानून में है ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य?
सदन से बाहर जाने से पहले फौजिया शेख अलीम ने सभापति से मांग की कि उन्हें वह अधिनियम दिखाया जाए जिसमें ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य किया गया हो। हालांकि, कुछ ही देर बाद वे स्वयं सदन से बाहर चली गईं।
सदन के बाहर मीडिया से बातचीत में फौजिया ने स्पष्ट किया कि उनका धर्म इस्लाम उन्हें ‘वंदे मातरम’ गाने की अनुमति नहीं देता। वहीं, एक अन्य कांग्रेस पार्षद रूबीना इकबाल खान के बयान ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया। उन्होंने कहा कि “अगर एक बाप की औलाद हो तो बुलवाकर दिखाओ।”
नेता प्रतिपक्ष बोले — व्यक्तिगत इच्छा है ‘वंदे मातरम’ गाना
नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस पार्षद चिंटू चौकसे ने इस विवाद पर कहा कि ‘वंदे मातरम’ गाना या न गाना किसी व्यक्ति की निजी इच्छा हो सकती है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के सम्मान के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। चौकसे ने बताया कि पूरे घटनाक्रम की जानकारी प्रदेश अध्यक्ष को दे दी गई है।
कांग्रेस पार्षद का आरोप — अधिकारी सवालों से बचते हैं
बजट बैठक के दौरान कांग्रेस पार्षद राजू भदौरिया ने अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कई मामलों में अधिकारियों को खुद जानकारी नहीं होती और सवाल पूछने पर वे जिम्मेदारी दूसरे विभागों पर डाल देते हैं। इस पर महापौर ने आश्वासन दिया कि सभी लंबित प्रश्नों के उत्तर आगामी सात दिनों के भीतर उपलब्ध कराए जाएंगे।
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