अप्रैल महीने में आमतौर पर गर्मी की शुरुआत हो जाती है, लेकिन इस बार मौसम का मिजाज कुछ अलग रहा। 11 अप्रैल तक शहर का अधिकतम तापमान 37.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से एक डिग्री कम था। हालांकि, इसके बाद मौसम ने तेजी से करवट ली और 15 अप्रैल तक तापमान बढ़कर 40 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया।
गर्मी के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए जिला प्रशासन ने स्कूलों के समय में बदलाव किया है। स्पष्ट है कि अप्रैल के शेष दिनों में तेज धूप और गर्मी का असर और बढ़ेगा।
अप्रैल का मौसम पैटर्न
अप्रैल में शहर में गर्मी लगातार बढ़ती है और तापमान में निरंतर वृद्धि देखी जाती है। इस दौरान हवा की दिशा मुख्य रूप से पश्चिमी रहती है और दिन-रात के तापमान में काफी अंतर होता है। ऐतिहासिक रूप से इस महीने का अधिकतम तापमान 25 अप्रैल 1958 को 44.6 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 1 अप्रैल 1905 को 7.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। वहीं, 1895 में इस महीने में सर्वाधिक 57.4 मिमी वर्षा दर्ज की गई थी। पिछले एक दशक के आंकड़े बताते हैं कि अधिकतम तापमान आमतौर पर महीने के अंतिम दिनों में दर्ज होता है।
मौसम विभाग के अनुसार, अप्रैल के दूसरे पखवाड़े में सूरज की तीव्रता बढ़ने, हवा की दिशा में बदलाव और नमी में कमी के कारण तापमान तेजी से बढ़ता है। इंदौर में भी यही स्थिति बन रही है और आने वाले दिनों में तापमान में वृद्धि जारी रहने की संभावना है।
प्रदेश स्तर पर 15 अप्रैल को सबसे अधिक तापमान नौगांव (छतरपुर) में 42.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान पचमढ़ी में 14.8 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग ने राज्य के 16 जिलों में लू का अलर्ट जारी किया है, जबकि 24 शहरों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक दर्ज किया गया।
जल संकट की आशंका
तेज गर्मी के कारण शहर में जल संकट भी गहराने लगा है। नगर निगम के अनुसार, शहर में 6017 से अधिक सरकारी बोरिंग हैं, जिनमें से 500 से ज्यादा सूख चुके हैं। स्थिति को देखते हुए कई क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति टैंकरों के जरिए करनी पड़ सकती है। भविष्य में जल संकट से बचाव के लिए पुराने कुओं और बावड़ियों के संरक्षण और पुनर्जीवन की आवश्यकता है।
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