इंदौर। शहर में पाकिस्तानी डिग्रियों के आधार पर मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों के दस्तावेजों की जांच अब स्वास्थ्य विभाग द्वारा कराई जाएगी। इस संबंध में जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर को शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसके बाद सीएमएचओ डॉ. माधव हासानी ने सभी जोनल अधिकारियों, खंड अधिकारियों और प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। आदेश में कहा गया है कि शहर में अस्पताल और क्लिनिक संचालित कर रहे ऐसे सभी डॉक्टरों के पंजीयन दस्तावेजों का सत्यापन किया जाए, जो पाकिस्तानी डिग्री के आधार पर कार्यरत हैं। साथ ही अपंजीकृत पाए जाने वाले डॉक्टरों की सूची तैयार कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट तीन दिनों के भीतर प्रस्तुत करने को कहा गया है। उल्लेखनीय है कि कलेक्टर के समक्ष 32 डॉक्टरों के खिलाफ गंभीर शिकायत दर्ज कराई गई थी।
बिना वैध लाइसेंस इलाज करने के आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुछ डॉक्टर कथित रूप से बिना वैध लाइसेंस और संदिग्ध पाकिस्तानी डिग्रियों के आधार पर मरीजों का उपचार कर रहे हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार डॉ. पंजवानी और डॉ. बागेचा द्वारा एक महिला के गलत इलाज से मौत का मामला भी सामने आया था। इस प्रकरण में उच्च न्यायालय के संज्ञान लेने और एफआईआर दर्ज होने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोई व्यापक जांच अभियान नहीं चलाया गया। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि जांच के दौरान कुछ डॉक्टरों की डिग्रियां फर्जी पाए जाने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। मामले में सीएमएचओ की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं।
गौरतलब है कि शहर में कई ऐसे डॉक्टर सक्रिय होने की बात सामने आई है, जो पाकिस्तानी डिग्रियों के आधार पर इलाज कर रहे हैं। ऐसे मामलों को मरीजों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना जा रहा है। इसे देखते हुए फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
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