अगस्त में शुरू होगा अत्याधुनिक कैंसर इंस्टीट्यूट, इंदौर और आसपास के मरीजों को मिलेगा बड़ा लाभ
इंदौर। “एक सिगरेट, एक गुटखा या सिर्फ मजाक-मजाक में शुरू हुई आदत… धीरे-धीरे जिंदगी की सबसे बड़ी बीमारी में बदल सकती है।” विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर Medanta Super Speciality Hospital ने लोगों को तंबाकू छोड़ने और कैंसर के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया। अस्पताल के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि तंबाकू अब केवल व्यक्तिगत आदत नहीं, बल्कि देश के सामने गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुका है।
अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि भारत में तंबाकू सेवन तेजी से कैंसर के मामलों को बढ़ा रहा है। खासतौर पर गुटखा, खैनी, जर्दा और पान मसाला जैसे चबाने वाले तंबाकू उत्पाद युवाओं को तेजी से अपनी गिरफ्त में ले रहे हैं। यही कारण है कि अब मुंह का कैंसर केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कम उम्र के लोगों में भी तेजी से बढ़ रहा है।
भारत में हर साल लाखों मौतों की वजह बन रहा तंबाकू
विशेषज्ञों के अनुसार भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां तंबाकू का सेवन सबसे अधिक होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक देश में हर वर्ष करीब 13.5 लाख लोगों की मौत तंबाकू जनित बीमारियों से होती है। वहीं दुनिया भर में यह आंकड़ा 70 लाख से अधिक है।
डॉक्टरों ने बताया कि तंबाकू केवल फेफड़ों को ही नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि मुंह, गला, जीभ, स्वरयंत्र, भोजन नली, अग्न्याशय और मूत्राशय समेत कई अंगों में कैंसर का खतरा बढ़ाता है। सबसे ज्यादा चिंता ओरल कैंसर को लेकर है, क्योंकि भारत वैश्विक ओरल कैंसर बोझ का लगभग 23 प्रतिशत हिस्सा वहन करता है।
“शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज करना सबसे बड़ी गलती”
मेदांता सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, इंदौर के डॉ. अमेय बिहानी, डायरेक्टर, कैंसर केयर ने कहा कि अधिकांश मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं जब बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है। उन्होंने बताया कि मुंह में लंबे समय तक घाव रहना, सफेद या लाल चकत्ते, लगातार खांसी, आवाज बदलना, निगलने में परेशानी या अचानक वजन घटना कैंसर के शुरुआती संकेत हो सकते हैं।
उन्होंने कहा, “अगर कैंसर की पहचान शुरुआती अवस्था में हो जाए तो कई मामलों में इलाज पूरी तरह संभव है। तंबाकू छोड़ना केवल अपनी जिंदगी बचाना नहीं, बल्कि पूरे परिवार को मानसिक और आर्थिक संकट से बचाना है।”
“गुटखा भी उतना ही खतरनाक जितनी सिगरेट”
मेदांता सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, इंदौर के डॉ. प्रांजिल मंडलोई कंसल्टेंट- मेदांता इंदौर के मेडिकल ऑन्कोलॉजी ने कहा कि आज भी लोगों में यह गलतफहमी है कि केवल धूम्रपान ही नुकसानदायक है, जबकि गुटखा और अन्य चबाने वाले तंबाकू उत्पाद भी बेहद खतरनाक हैं। उन्होंने कहा कि भारत में ओरल कैंसर के अधिकांश मामलों के पीछे तंबाकू की सीधी भूमिका सामने आती है।
उन्होंने यह भी कहा कि शरीर में सुधार की प्रक्रिया तंबाकू छोड़ने के तुरंत बाद शुरू हो जाती है, इसलिए इसे छोड़ने का सबसे सही समय “आज” है।
देश में तेजी से बढ़ रहे कैंसर के मामले
विशेषज्ञों के अनुसार वर्ष 2022 में भारत में 14.6 लाख से अधिक नए कैंसर मामले सामने आए। अनुमान है कि आने वाले वर्षों में यह संख्या और बढ़ सकती है। आंकड़ों के मुताबिक देश में हर नौ में से एक व्यक्ति अपने जीवनकाल में किसी न किसी प्रकार के कैंसर से प्रभावित हो सकता है।
अगस्त में शुरू होगा अत्याधुनिक कैंसर इंस्टीट्यूट
मेदांता सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. संजय गीद ने बताया कि आधुनिक चिकित्सा में कैंसर उपचार तेजी से विकसित हो रहा है और अब मरीजों को अधिक सटीक एवं मल्टी-डिसिप्लिनरी इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है।
इसी दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए मेदांता इंदौर आगामी 15 अगस्त 2026 से अत्याधुनिक कैंसर इंस्टीट्यूट शुरू करने जा रहा है। यहां कैंसर की शुरुआती जांच, विशेषज्ञ परामर्श, मेडिकल ऑन्कोलॉजी सेवाएं और समग्र कैंसर उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। इससे इंदौर सहित आसपास के जिलों के मरीजों को महानगरों पर कम निर्भर रहना पड़ेगा।
लोगों से की यह अपील
विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर मेदांता इंदौर ने नागरिकों से अपील की है कि वे स्वयं तंबाकू से दूरी बनाएं, बच्चों और युवाओं को इसकी लत से बचाएं तथा नियमित स्वास्थ्य जांच को प्राथमिकता दें। अस्पताल का कहना है कि तंबाकू छोड़ने का फैसला केवल आदत बदलने का नहीं, बल्कि जिंदगी बचाने का निर्णय है।
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