इंदौर। नगर निगम परिषद के चार वर्ष पूरे होने पर महापौर पुष्यमित्र भार्गव और महापौर परिषद (एमआईसी) के सदस्यों ने अपने कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत किया। महापौर ने कहा कि परिषद ने “क्लीन इंदौर, ग्रीन इंदौर और डिजिटल इंदौर” के विजन के साथ काम शुरू किया था। पिछले चार वर्षों में पेयजल, सड़क, सीवरेज, स्वच्छता, डिजिटल गवर्नेंस और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को अमलीजामा पहनाया गया है। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि नेहरू स्टेडियम रिवाइवल परियोजना अब तक शुरू नहीं हो सकी है, जिसे अगले एक वर्ष में गति देने का लक्ष्य रखा गया है।
डिजिटल इंदौर की ओर बड़ा कदम
महापौर ने बताया कि इंदौर देश का पहला नगर निगम बन गया है, जिसने डिजिटल एड्रेस सिस्टम लागू किया है। नगर निगम की सभी सेवाओं और विभागों को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने का काम अंतिम चरण में है। साथ ही वार्डों की डिजिटल प्लानिंग भी की जा रही है।
ग्रीन बॉन्ड से बना सोलर प्लांट, हर माह 4 करोड़ की बचत
उन्होंने बताया कि नगर निगम द्वारा जारी किए गए देश के पहले म्युनिसिपल ग्रीन बॉन्ड से जलूद में 60 मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित किया गया है। इससे निगम के बिजली खर्च में हर महीने करीब चार करोड़ रुपये की बचत हो रही है। वहीं अब तक 3,200 से अधिक घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं।
2047 की जरूरतों को ध्यान में रखकर जल परियोजनाएं
महापौर के अनुसार, भविष्य की पेयजल आवश्यकताओं को देखते हुए 2,156 करोड़ रुपये से अधिक लागत की चार मेगा जलप्रदाय परियोजनाओं पर काम शुरू हो चुका है। इनमें 400 एमएलडी क्षमता का आधुनिक वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, 1,650 एमएलडी इनटेक वेल, 40 नई ओवरहेड टंकियां, 1,577 किलोमीटर नई पाइपलाइन, लगभग 2.48 लाख नए घरेलू नल कनेक्शन तथा स्मार्ट जल प्रबंधन प्रणाली शामिल हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2047 तक की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए करीब 2,600 करोड़ रुपये की अतिरिक्त परियोजनाएं भी तैयार की गई हैं, जिनके लिए ब्लू बॉन्ड के माध्यम से संसाधन जुटाने की योजना है।
स्वच्छता में फिर नंबर-1 बनने का दावा
महापौर ने बताया कि शहर में प्रतिदिन लगभग 800 टन गीला कचरा एकत्र हो रहा है, जबकि वर्तमान प्रसंस्करण क्षमता 500 टन है। इसे बढ़ाने के लिए सीएटी रोड और पितृ पर्वत पर दो नए सीएनजी प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि इंदौर इस वर्ष भी स्वच्छता सर्वेक्षण में देश में पहला स्थान हासिल करेगा।
800 करोड़ से अधिक की सड़क परियोजनाएं
शहर की बढ़ती यातायात जरूरतों को देखते हुए 800 करोड़ रुपये से अधिक लागत की सड़क परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। 23 मास्टर प्लान सड़कों सहित करीब 36 प्रमुख सड़क और लिंक रोड विकसित किए जा रहे हैं। इनमें एमआर-10 से एमआर-12 लिंक रोड, एयरपोर्ट लिंक रोड, चंदन नगर लिंक रोड तथा एडवांस अकादमी से रिंग रोड तक की सड़क प्रमुख हैं। इसके अलावा सराफा और राजवाड़ा क्षेत्र में आपातकालीन वाहनों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए भी विशेष कार्य किए गए हैं।
सीवरेज नेटवर्क का विस्तार
महापौर ने बताया कि पिछले चार वर्षों में 122.09 करोड़ रुपये की लागत से सात प्रमुख सीवरेज परियोजनाएं पूरी की गई हैं तथा 30.65 किलोमीटर नई सीवर लाइन बिछाई गई है। वर्तमान में नौ परियोजनाओं पर कार्य जारी है। वहीं नमामि गंगे, अमृत-2.0, सिंहस्थ-2028 और अर्बन चैलेंज फंड के तहत लगभग 1,900 करोड़ रुपये की नई परियोजनाओं की कार्ययोजना तैयार की गई है। इनके माध्यम से 687 एमएलडी नई सीवरेज ट्रीटमेंट क्षमता और 450 किलोमीटर से अधिक सीवर नेटवर्क विकसित किया जाएगा। अमृत-2.0 के तहत निगम सीमा में शामिल 29 गांवों तक पेयजल और ड्रेनेज नेटवर्क का विस्तार भी किया जा रहा है।
अनंत इंदौर की दिशा में आगे बढ़ता शहर
महापौर ने कहा कि परिषद का उद्देश्य केवल पांच वर्षों का कार्यकाल पूरा करना नहीं, बल्कि अगले 25 वर्षों के इंदौर की मजबूत नींव तैयार करना है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल आज के इंदौर का विकास नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सक्षम, आत्मनिर्भर, समृद्ध और विश्वस्तरीय शहर का निर्माण करना है। आगामी एक वर्ष में मास्टर प्लान की सड़कें, जल प्रदाय, सीवरेज, डिजिटल गवर्नेंस, पर्यावरण संरक्षण, उपचारित जल के पुन: उपयोग तथा नेहरू स्टेडियम रिवाइवल जैसी लंबित परियोजनाओं को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि विकास की निरंतरता, दूरदृष्टि और जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ना ही “अनंत इंदौर” का संकल्प है।
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