इंदौर। लिवर की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए अब इलाज की शुरुआती राह इंदौर में ही आसान होगी। यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद के लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. युक्तांश पांडे अब हर महीने इंदौर आकर शहर और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को परामर्श देंगे। इसकी घोषणा हाल ही में आयोजित एक स्वास्थ्य संवाद कार्यक्रम में की गई।
कार्यक्रम में वे मरीज और उनके परिजन भी शामिल हुए, जिनका सफल लिवर ट्रांसप्लांट हो चुका है। उन्होंने बताया कि लिवर फेलियर (एंड-स्टेज लिवर डिज़ीज़) की स्थिति में जब उम्मीद टूटने लगी थी, तब डॉ. पांडे के मार्गदर्शन और यशोदा हॉस्पिटल्स की टीम की देखरेख से उन्हें नया जीवन मिला। आज ये सभी मरीज स्वस्थ हैं और सामान्य, सक्रिय जीवन जी रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य ट्रांसप्लांट के बाद मरीजों के जीवन में आए बदलावों को साझा करना और अंगदान तथा लिवर स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाना था।
“मरीज और परिवार को नया जीवन देने का माध्यम”
डॉ. युक्तांश पांडे ने कहा, “एक सफल लिवर ट्रांसप्लांट केवल सर्जरी नहीं, बल्कि मरीज और उसके पूरे परिवार को नया जीवन और संबल देने का माध्यम है। इन मरीजों को मुस्कुराते और सक्रिय देखना हमारी पूरी टीम के लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है। हमारा प्रयास है कि देश के हर कोने तक पारदर्शी और सुलभ लिवर केयर पहुंचे। इंदौर में यह मासिक ओपीडी इसी दिशा में एक कदम है।”
मरीजों को बड़े शहरों के चक्कर से राहत
इस पहल का मकसद मध्य प्रदेश के गंभीर लिवर रोगियों को महानगरों की दौड़-भाग और उससे जुड़े आर्थिक बोझ से बचाना है। अब विशेषज्ञ परामर्श और फॉलो-अप की सुविधा स्थानीय स्तर पर मिलेगी।
ओपीडी अपॉइंटमेंट, मेडिकल रिपोर्ट के मूल्यांकन और ट्रांसप्लांट से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए मरीज और उनके परिजन इंदौर में लोकल कोऑर्डिनेटर आनंद राठौर से संपर्क कर सकते हैं।
जानिए, लिवर ट्रांसप्लांट से जुड़ी चार जरूरी बातें
- सामान्य जीवन संभव: आधुनिक सर्जिकल तकनीकों की मदद से ट्रांसप्लांट के बाद मरीज अपनी दैनिक और पेशेवर जिंदगी में लौट सकते हैं।
- समय पर सलाह जरूरी: लिवर की पुरानी और गंभीर बीमारी में समय रहते विशेषज्ञ सर्जन से परामर्श लेना जीवन रक्षा के लिए अहम है।
- उन्नत सुविधाएं: यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद में संक्रमण-मुक्त आईसीयू और उच्च-स्तरीय क्रिटिकल केयर यूनिट जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
- अंगदान से बचती हैं जानें: ब्रेन डेड (कैडेवर) या लिविंग डोनेशन के लिए लोग आगे आएं तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
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