युद्ध से लेकर एआई के दौर में लेखन तक पर हुई चर्चा
इंदौर। इंदौर में तीन दिवसीय वाणी साहित्य उत्सव का गुरुवार को दीप प्रज्ज्वलन के साथ शुभारंभ हुआ। पहले दिन युद्ध, समकालीन लेखन, स्त्री विमर्श, पौराणिक कथाओं के पुनर्पाठ और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में लेखक व संपादक की भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा हुई। देशभर से आए विभिन्न भाषाओं के लेखक, संपादक और साहित्य प्रेमी इस उत्सव में शामिल हुए।
उद्घाटन समारोह में माधव कौशिक, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, पद्मश्री शीन काफ़ निज़ाम, वाणी त्रिपाठी टिक्कू, उदय प्रकाश, ज्योति जैन, निखिल दवे, विश्वास व्यास और वाणी प्रकाशन के निदेशक अरुण माहेश्वरी सहित कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।
एआई के दौर में लेखकों की भूमिका पर मंथन
पहले दिन ‘एआई युग में लेखक और संपादक की भूमिका’ सत्र ज्ञानरंजन की स्मृति को समर्पित रहा। इसमें माधव कौशिक, उर्मिला शिरीष और सत्य व्यास ने भाग लिया। रोहिणी कुमारी के संचालन में हुए संवाद में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव, लेखन की मौलिकता और साहित्य के भविष्य पर विचार साझा किए गए।
लेखक माधव कौशिक ने कहा कि बदलते समय में तकनीक साहित्य और लेखन की दुनिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को केवल चुनौती के रूप में देखने के बजाय लेखकों को इसे सकारात्मक दृष्टिकोण से समझना और अपनाना चाहिए। तकनीक का उपयोग करते हुए रचनात्मकता और मौलिकता बनाए रखना जरूरी है। इससे साहित्य को नए पाठकों तक पहुंचाने और लेखन की संभावनाओं का विस्तार करने में मदद मिल सकती है।
साहित्य में स्त्री अनुभवों और बदलते घर पर चर्चा
‘स्त्रियां घर लौटती हैं’ सत्र चंद्रकान्त देवताले की स्मृति को समर्पित रहा। इसमें विवेक चतुर्वेदी, उदय प्रकाश, हेमंत देवलेकर और मालिनी गौतम ने भाग लिया। संतोष द्विवेदी के संचालन में हुए इस सत्र में साहित्य में स्त्री की उपस्थिति, घर के बदलते अर्थ और समकालीन रचनाओं में स्त्री अनुभवों की अभिव्यक्ति पर चर्चा हुई।
इसके बाद ‘लेखन की यात्रा, सत्य व्यास की जुबानी’ सत्र में लेखक सत्य व्यास ने अपनी रचनात्मक यात्रा, लेखन के अनुभवों और साहित्यिक दृष्टिकोण से जुड़े पहलुओं को साझा किया। संवाद का संचालन अदिति माहेश्वरी ने किया।
पौराणिक कथाओं के पुनर्पाठ पर संवाद
‘पौराणिक कथाओं का पुनः पाठ’ सत्र में अक्षत गुप्ता और सौम्या कुलश्रेष्ठ के बीच संवाद हुआ। इसमें पौराणिक आख्यानों की समकालीन प्रासंगिकता, उनमें निहित जीवन-दृष्टि और आधुनिक समाज के संदर्भ में उनकी पुनर्व्याख्या पर विचार रखे गए।
धर्मवीर भारती की स्मृति को समर्पित ‘मतलब हिन्दू, असम्भव सारांश: गद्य और पद्य की जुगलबंदी’ सत्र में अम्बर पाण्डेय और आशुतोष दुबे ने हिस्सा लिया। उत्पल बनर्जी के संचालन में हुए इस सत्र में गद्य और पद्य के आपसी संबंधों तथा साहित्यिक अभिव्यक्ति के विभिन्न रूपों पर चर्चा हुई।
अमृता प्रीतम की स्मृति में संगीत प्रस्तुति
वाणी साहित्य उत्सव के पहले दिन का समापन कालजयी लेखिका अमृता प्रीतम को समर्पित ‘मैं तैनूं फिर मिलांगी’ सत्र के साथ हुआ। इसमें सौम्या कुलश्रेष्ठ और हरीश बुधवानी ने संगीत के माध्यम से अमृता प्रीतम की साहित्यिक संवेदना और उनकी रचनाओं को प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर अमिया कुंवर की कृति ‘इमरोजनामा’ के अंग्रेजी अनुवाद के आवरण का अनावरण माधव कौशिक और अक्षत गुप्ता ने किया। पुस्तक का अंग्रेजी अनुवाद सौम्या कुलश्रेष्ठ ने किया है।
साहित्यिक पहचान को मजबूत करते हैं ऐसे आयोजन : महापौर
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि इंदौर में वाणी साहित्य उत्सव जैसे आयोजनों का होना स्वागतयोग्य है। इंदौर की पहचान केवल स्वच्छता और खानपान तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर अपनी साहित्यिक समृद्धि और सांस्कृतिक विरासत के लिए भी जाना जाता है। ऐसे आयोजन शहर की साहित्यिक पहचान को मजबूत करने के साथ नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने का काम करते हैं।
वाणी प्रकाशन के निदेशक अरुण माहेश्वरी ने कहा कि उत्सव के माध्यम से साहित्य को केवल पुस्तकों तक सीमित न रखते हुए संवाद और विचार-विमर्श का जीवंत माध्यम बनाने का प्रयास किया जा रहा है। साहित्य समाज, समय और व्यक्ति के बीच सेतु का काम करता है। ऐसे आयोजन लेखकों, पाठकों और साहित्य में रुचि रखने वाले लोगों को एक मंच पर लाकर विचारों के आदान-प्रदान और साहित्य की नई संभावनाओं पर चर्चा का अवसर देते हैं।
रंगकर्मी एवं लेखिका वाणी त्रिपाठी टिक्कू ने कहा कि साहित्य बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर उम्र के व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण है। साहित्य पर चर्चा करना और उसे जीवन का हिस्सा बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि वाणी साहित्य उत्सव जेन-ज़ी से लेकर मध्यम आयु वर्ग और बुजुर्गों तक सभी पीढ़ियों को महत्व देता है। इस तरह के आयोजन अलग-अलग पीढ़ियों को साहित्य से जोड़ने और उनके बीच संवाद स्थापित करने का अवसर देते हैं।
Thank you for reading this post!
