इंदौर। दिव्यांग बच्चों को बेहतर उपचार, पुनर्वास और आत्मनिर्भर जीवन का अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से पिछले 36 वर्षों से जारी सेवा अभियान अब एक नए पड़ाव पर पहुंचने जा रहा है। मध्य प्रदेश के दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में आर्थिक एवं सामाजिक रूप से वंचित परिवारों के उन बच्चों तक चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने का यह प्रयास वर्ष 1991 में शुरू हुआ था, जो शारीरिक अक्षमता के कारण कभी अपने पैरों पर चलने में भी असमर्थ थे। इस अभियान के माध्यम से अब तक हजारों बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा चुका है।
इसी सेवा यात्रा को आगे बढ़ाते हुए यूनिक हॉस्पिटल इंदौर, नीमा इंस्टीट्यूट फॉर ऑर्थोपेडिक एंड रिहैबिलिटेशन ट्रस्ट एवं आरोग्य भारती इंदौर महानगर के संयुक्त प्रयासों से 30 बेड के निःशुल्क बाल सेवा विशिष्ट वार्ड की स्थापना की जा रही है। यह वार्ड आर्थिक रूप से कमजोर एवं दिव्यांग बच्चों को बेहतर चिकित्सा, सर्जरी और पुनर्वास संबंधी सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराने के लिए समर्पित रहेगा।
वार्ड का लोकार्पण 5 नवंबर 2026, गुरुवार को शाम 7 से 9 बजे तक यूनिक हॉस्पिटल, इंदौर में आयोजित समारोह में किया जाएगा। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह आलोक कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय विशेष अतिथि होंगे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता तिरुपति स्टार्च एंड केमिकल्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अमित मोदी करेंगे।
यूनिक हॉस्पिटल के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं प्रख्यात ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. प्रमोद नीमा ने कहा कि चिकित्सा का उद्देश्य केवल बीमारी का उपचार करना नहीं, बल्कि जरूरतमंद व्यक्ति को बेहतर और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर देना भी है। आर्थिक परिस्थितियों के कारण कई बच्चों को समय पर उचित उपचार नहीं मिल पाता। ऐसे में 30 बेड का यह निःशुल्क बाल सेवा विशिष्ट वार्ड बच्चों के उपचार के साथ उनके पुनर्वास और बेहतर भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह जरूरतमंद बच्चों और उनके परिवारों के लिए आशा और सहयोग का एक नया केंद्र बनेगा।
आरोग्य भारती मालवा प्रांत के कार्याध्यक्ष डॉ. लोकेश जोशी ने कहा कि किसी भी संवेदनशील समाज की पहचान इस बात से होती है कि वह अपने सबसे जरूरतमंद वर्ग के प्रति कितनी जिम्मेदारी निभाता है। विशेष आवश्यकता वाले एवं दिव्यांग बच्चों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा, सर्जरी, पुनर्वास और निरंतर देखभाल उपलब्ध कराना केवल स्वास्थ्य सेवा नहीं, बल्कि उनके आत्मसम्मान और आत्मनिर्भर भविष्य के निर्माण का संकल्प है। यह 30 बेड का निःशुल्क वार्ड इसी सेवा भावना का साकार स्वरूप है, जो ‘सेवा परमो धर्मः’ के आदर्श को आगे बढ़ाएगा।
इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता इसके पीछे जुड़ी 36 वर्षों की सतत सेवा यात्रा है। वर्ष 1991 से संचालित इस अभियान के अंतर्गत मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से आने वाले दिव्यांग बच्चों को उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। अब तक लगभग 30 हजार बच्चों की निःशुल्क सर्जरी की जा चुकी है। इस दौरान कुल 548 चिकित्सा शिविरों का आयोजन कर बच्चों की पहचान, स्वास्थ्य जांच, आवश्यक ऑपरेशन, कृत्रिम उपकरणों की उपलब्धता और पुनर्वास जैसी सेवाएं प्रदान की गई हैं।
समय पर उपचार और सफल सर्जरी के बाद आज ऐसे अनेक बच्चे अपने पैरों पर खड़े होकर सामान्य जीवन जी रहे हैं। इस अभियान ने न केवल बच्चों को चलने-फिरने और आत्मनिर्भर बनने में मदद की है, बल्कि उनके परिवारों को भी नई उम्मीद और आत्मविश्वास दिया है। इस तरह यह पहल महज चिकित्सा सेवा तक सीमित न रहकर हजारों परिवारों के जीवन में बदलाव लाने का माध्यम बनी है।
30 बेड के निःशुल्क बाल सेवा विशिष्ट वार्ड की स्थापना इसी सेवा संकल्प को और व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक अभाव किसी भी बच्चे के उपचार, स्वस्थ जीवन और बेहतर भविष्य की राह में बाधा न बने। चिकित्सा विशेषज्ञता, सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवीय संवेदना के समन्वय से शुरू होने वाली यह पहल आने वाले समय में जरूरतमंद बच्चों के जीवन में नई उम्मीद और संभावनाओं के द्वार खोलेगी।
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