इंदौर। आर्थिक व सामाजिक रूप से वंचित दिव्यांग बच्चों के उपचार, पुनर्वास और आत्मनिर्भरता के लिए तीन दशकों से अधिक समय से जारी सेवा अभियान को गुरुवार को नया आयाम मिला। यूनिक हॉस्पिटल में 30 बेड के निःशुल्क बाल सेवा विशिष्ट वार्ड का लोकार्पण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह आलोक कुमार ने किया। आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय विशेष अतिथि रहे, जबकि तिरुपति स्टार्च एंड केमिकल्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अमित मोदी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
यह वार्ड यूनिक हॉस्पिटल, नीमा इंस्टीट्यूट फॉर ऑर्थोपेडिक एंड रिहैबिलिटेशन ट्रस्ट और आरोग्य भारती इंदौर महानगर के संयुक्त प्रयासों से बना है। इसका लक्ष्य आर्थिक रूप से कमजोर और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को निःशुल्क व गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा उपलब्ध कराना है।
“सेवा ही समाज की असली शक्ति”
मुख्य अतिथि आलोक कुमार ने कहा कि किसी समाज की वास्तविक ताकत उसकी संवेदनशीलता और सेवा भावना में होती है। जो समाज अपने सबसे कमजोर सदस्यों के जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास करता है, वही सही अर्थों में सशक्त और समृद्ध बनता है। उन्होंने इस वार्ड को सेवा, समर्पण और सामाजिक दायित्व का प्रेरक उदाहरण बताया, जो हजारों दिव्यांग बच्चों में आत्मविश्वास, सम्मान और नई संभावनाएं जगाएगा।
“स्वास्थ्य सेवा का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे”
डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा तभी सार्थक है जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। समय पर उपचार, सर्जरी और पुनर्वास के जरिए दिव्यांग बच्चों को स्वावलंबी बनाना श्रेष्ठ मानवीय सेवा है। उन्होंने कहा कि यह अभियान वर्षों से हजारों परिवारों में आशा जगा रहा है और नया वार्ड इसे अधिक व्यवस्थित, प्रभावी और व्यापक बनाएगा।
यूनिक हॉस्पिटल के प्रबंध निदेशक एवं वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. प्रमोद नीमा ने कहा कि चिकित्सा का उद्देश्य केवल रोग का इलाज नहीं, बल्कि जरूरतमंद को सम्मान के साथ बेहतर जीवन का अवसर देना भी है। उन्होंने बताया कि आर्थिक तंगी के कारण कई बच्चों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता, ऐसे बच्चों और परिवारों के लिए यह वार्ड आशा, उपचार और सहयोग का केंद्र बनेगा।
आरोग्य भारती मालवा प्रांत के कार्याध्यक्ष डॉ. लोकेश जोशी ने कहा कि संवेदनशील समाज की पहचान इससे होती है कि वह अपने सबसे जरूरतमंद लोगों के प्रति कितना जिम्मेदार है। दिव्यांग बच्चों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा, सर्जरी, पुनर्वास और निरंतर देखभाल देना सिर्फ स्वास्थ्य सेवा नहीं, उनके बेहतर भविष्य का संकल्प है।
मंच पर दिखा आत्मविश्वास
कार्यक्रम का सबसे भावुक पल वे बच्चे रहे, जो कभी दिव्यांगता के कारण चलने-फिरने में कठिनाई झेलते थे, पर इलाज और सर्जरी के बाद आज आत्मविश्वास से मंच पर प्रस्तुति दे रहे थे। लगभग 200 किलोमीटर दूर से तीन दिन पहले इंदौर पहुंचे इन बच्चों ने अभ्यास के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए, जिन्हें खूब सराहना मिली।
अब तक का सफर
वर्ष 1991 से जारी इस अभियान के तहत मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों के लगभग 30,000 दिव्यांग बच्चों का उपचार किया जा चुका है। 548 चिकित्सा शिविरों के माध्यम से बच्चों की पहचान, जांच, सर्जरी, कृत्रिम उपकरण और पुनर्वास की सुविधाएं दी गईं। समय पर इलाज पाकर हजारों बच्चे आज अपने पैरों पर खड़े होकर सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं।
समारोह में संतजन, सामाजिक व सेवा संगठनों के प्रतिनिधि, चिकित्सक, उद्योग जगत के गणमान्य नागरिक, आरोग्य भारती के कार्यकर्ता, यूनिक हॉस्पिटल व नीमा ट्रस्ट का स्टाफ और बड़ी संख्या में समाजसेवी उपस्थित रहे।
अंत में डॉ. के. के. नीमा ने सभी अतिथियों, सहयोगी संस्थाओं और कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह वार्ड केवल एक स्वास्थ्य सुविधा नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व के समन्वय का सशक्त उदाहरण है। यह पहल आने वाले वर्षों में हजारों जरूरतमंद बच्चों के जीवन में आशा, आत्मविश्वास और सम्मान का संचार करेगी और “सेवा परमो धर्मः” की भावना को और व्यापक बनाएगी।
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