इंदौर– लोकप्रिय बाल टीवी कार्यक्रम ‘आर्ट अटैक’ के पूर्व मेजबान और वर्तमान शिक्षण अनुभव डिजाइनर गौरव जुयाल ने आज इंदौर स्थित सत्व टाइनी एक्सप्लोरर्स प्रेप स्कूल में दो विशेष कार्यशालाओं का आयोजन किया। पहली कार्यशाला में उन्होंने बच्चों को कला और रचनात्मकता का महत्व समझाया, जबकि दूसरी में अभिभावकों से संवाद किया। सत्व स्कूल कला समन्वय पर विशेष ध्यान देता है। स्कूल का मानना है कि प्रत्येक बच्चे में कला, रचनात्मकता और खेल के प्रति स्वाभाविक झुकाव होता है। अतः स्कूल का प्रयास है कि बच्चों को हर विषय कला के माध्यम से खेल-खेल में सिखाया जाए।

गौरव जुयाल ने बच्चों को ‘गीले-पर-गीला’ (वेट-ऑन-वेट) तकनीक से चित्रकारी सिखाई। गौरव का कहना है, “छोटे बच्चों के साथ रूपरेखा वाले चित्र कम बनाने चाहिए। रूपरेखा का अर्थ है कि आप चीजों को एक निश्चित आकार में सीमित कर रहे हैं, जबकि बचपन में बच्चों को विस्तार की स्वतंत्रता देनी चाहिए। मैं इस गतिविधि में केवल दो रंगों का उपयोग करता हूँ क्योंकि दो रंगों के मिश्रण से बच्चे स्वयं आकृतियाँ बनाने का प्रयास करते हैं।”
कार्यशाला के दौरान बच्चों के खेल के महत्व पर भी चर्चा हुई। गौरव का मानना है कि खेल बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “यदि आप जीवन के साथ खेलना सीख जाते हैं, तो आपका दृष्टिकोण बदल जाता है।”

सत्व टाइनी एक्सप्लोरर्स प्रेप स्कूल के संस्थापक अथर्व शर्मा ने कहा, “सीखना भी एक कला है, जो समय और संगति के साथ विकसित होती है। बच्चे के पहले और सबसे महत्वपूर्ण मार्गदर्शक उनके माता-पिता होते हैं, जिनसे बच्चे सीखना सीखते हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि माता-पिता भी पालन-पोषण को सही ढंग से सीखें। बच्चों की प्रगति में उनका परिवेश भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि उनके आसपास संगीत, प्रकृति, साहित्य और कला है, तो हालांकि उनके भविष्य के करियर के बारे में निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता, लेकिन वे बेहतर इंसान बनने के साथ-साथ परिवार, समाज और देश के प्रति समर्पित होने की अधिक संभावना रखते हैं।”
कार्यशाला के अंत में, गौरव ने बाल मनोविज्ञान पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि चार अलग-अलग प्रकार के व्यक्तित्व होते हैं और बच्चों के स्वभाव के अनुसार रणनीति बनानी चाहिए।
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