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संस्कृत सीखने से उच्चारण शुद्ध और प्रभावी होता है: सूर्यकांत नागर

Posted on August 29, 2024

बाल निकेतन संघ में धूमधाम से मना संस्कृत दिवस

इंदौर ।  बाल निकेतन संघ विद्यालय परिसर में हाल ही में गए संस्कृत दिवस के उपलक्ष्य पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों द्वारा संस्कृत में श्लोक, गुरू स्त्रोत, गीत, वेद पाठ ज्योर्तिलिंग, राम स्तुति,राष्ट्र गीत, नाटक, नृत्य नाटिका, राष्ट्रीय चिन्ह पर विद्यार्थियों द्वारा सुंदर प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम के मुख्य अथिति के रूप में लेखक एवंम. प्र. हिंदी साहित्य समिति इंदौर के उपसभापति, सूर्यकांत नागर जी, कर्मचारी राज्य बीमा निगम से सेवानिवृत एवं लेखक अरविंद रामचंद्र जवलेकर जी, बाल निकेतन संघ की सचिव डॉ श्रीमती नीलिमा अदमणे, विद्यालय प्राचार्य श्री संदीप धाकड़ मौजूद रहे।

इस अवसर पर बाल निकेतन संघ की सचिव डॉ. नीलिमा अदमणे ने कहा

“संस्कृत सभी भारतीय भाषाओं का मूल है, हमारी संस्कृति की जड़ें भी वहीं से निकलती है। संस्कृत सबसे बड़े शब्दकोश वाली भाषा है। हम गौरवान्वित महसूस करते हैं कि हम ऐसी माटी से आते हैं जहाँ से यह देवभाषा निकली।”

Sanskrit Day celebrated at Bal Niketan Sangh

इस अवसर पर संस्कृत का महत्त्व समझाते हुए लेखक एवं म. प्र. हिंदी साहित्य समिति इंदौर के उपसभापति, सूर्यकांत नागर जी ने कह-

“संस्कृत सीखे बिना हम अपने उस साहित्य को नहीं जान सकते, जो ऋषि मुनि और तपस्वी धरोहर के रूप में छोड़ गए हैं। इस भाषा को बोलने, सीखने से उच्चारण शुद्ध और प्रभावी होता है। हमें अपनी भाषा और अपनी संस्कृति पर अधिक जोर देना चाहिए, और बच्चों को बचपन से ही संस्कृत का अध्ययन शुरू करना चाहिए।”

कर्मचारी राज्य बीमा निगम से सेवानिवृत एवं लेखक अरविंद रामचंद्र जवलेकर जी ने अपने उद्बोधन में कह-

“मैं बाल निकेतन संघ को बहुत बधाई देना चाहता हु की उन्होंने संस्कृत को बढावा देने के लिए इस प्रकार का आयोजन किया। आज कल संस्कृत भाषा को एक वैकल्पिक भाषा का दर्जा दे दिया गया है जबकि संस्कृत दूसरी भाषाओं की जननी मानी जाती है। इसकी जगह दूसरी क्षेत्रीय भाषाओं ने ले ली है। बच्चो को भारत की पुरानी संस्कृति से जोड़ा जाए और जिसके लिए संस्कृत भाषा का ज्ञान बहुत ज़रूरी है।”

कार्यक्रम का संचालन बाल निकेतन संघ की अध्यापिका वर्षा दुबे एवं आभार अंजलि सिंह ने माना।

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