इंदौर में सराफा चौपाटी को लेकर विवाद गहरा गया है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव द्वारा मोमोज व चाइनीज फूड की दुकानों पर रोक लगाने के बाद व्यापारी भड़क उठे। निगम कार्रवाई से नाराज़ दुकानदारों ने पहले सराफा थाने और फिर महापौर के बंगले का घेराव किया। मुलाकात न होने पर वे देर रात कृष्णपुरा छत्री पहुंचे और अलाव जलाकर रातभर धरने पर बैठे रहे। कई व्यापारियों का आरोप है कि निगम की दुकान आवंटन सूची में गड़बड़ी है—कुछ लोगों के पास कई दुकानें हैं, जबकि पात्र नाम सूची से गायब हैं।
महापौर भार्गव ने साफ कहा कि सराफा की परंपरागत पहचान और सुरक्षा बनाए रखने के लिए मोमोज व चाइनीज फूड स्टॉल की अनुमति नहीं दी जाएगी। जिन दुकानों ने अनुमति के बिना स्टॉल लगाए हैं, उन्हें बंद कराया जाएगा और दुकानें हटाने की कार्रवाई भी की जा सकती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दुकान आवंटन सूची की दोबारा जांच होगी और एक से अधिक दुकान रखने वालों पर भी कार्रवाई की जाएगी। meanwhile, चौपाटी पर तनाव की स्थिति देखते हुए पुलिस बल तैनात रहा।
इस विवाद के बीच सराफा के कई पारंपरिक व्यापारियों ने महापौर के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि चौपाटी का मूल स्वरूप और सांस्कृतिक पहचान बचाना जरूरी है। उनका कहना है कि अनियमित और अस्थायी फास्ट-फूड स्टॉल न सिर्फ भीड़ बढ़ाते हैं बल्कि सुरक्षा पर भी असर डालते हैं। वहीं हटाए गए दुकानदारों का दावा है कि वे वर्षों से रोज़गार चला रहे हैं, ऐसे में अचानक की गई कार्रवाई से उनके परिवारों पर संकट खड़ा हो गया है, जिसे ध्यान में रखते हुए निगम को वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए।
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