स्वच्छता में आठवीं बार देश में सिरमौर बनने के बाद अब इंदौर की सफाई व्यवस्था फिर ढर्रे पर लौटती दिख रही है। शहर के कई इलाकों में अस्थायी कचरा पाइंट बन गए हैं, जहां लोग खुले में कचरा फेंक रहे हैं जो कई दिनों तक नहीं उठाया जा रहा। खासकर शहरी सीमा से लगी कॉलोनियों में ऐसे हालात ज्यादा देखने को मिल रहे हैं। प्रमुख मार्ग तो साफ-सुथरे हैं, लेकिन गलियों और फुटपाथों की सफाई में लापरवाही झलक रही है। चालान न बनने से लोग नालियों और खाली प्लॉटों में भी कचरा डाल रहे हैं।
पूर्व निगमायुक्त शिवम वर्मा और अपर आयुक्त अभिलाष शुक्ला के तबादले के बाद सफाई व्यवस्था पर असर पड़ा है। उनकी निगरानी में शहर ने स्वच्छता लीग में शीर्ष स्थान हासिल किया था, लेकिन अब हालात बिगड़ने लगे हैं। बारिश खत्म होने के बाद धूप में सूखा कीचड़ अब धूल में बदल गया है, जिससे लोगों को परेशानी हो रही है।
त्योहारों के चलते कचरे की मात्रा भी बढ़ गई है। आमतौर पर रोजाना डेढ़ हजार टन कचरा निकलता है, जो इन दिनों 1800 टन से अधिक हो गया है। दीपावली की सफाई के कारण कई लोग खुले में कचरा फेंक रहे हैं। स्वास्थ्य समिति प्रभारी अश्विनी शुक्ला ने बताया कि दीपावली को देखते हुए सफाई व्यवस्था के लिए अतिरिक्त अमला लगाया जाएगा और चालान की कार्रवाई भी तेज की जाएगी।
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