
इंदौर-उज्जैन के बीच स्थित बारोली टोल नाके पर एक मारपीट की घटना सामने आई है। इस घटना की शिकायत कलेक्टर और पुलिस से की गई है। यह घटना तीन दिन पुरानी है।दरअसल, पहले बारोली टोल नाका एमपीआरडीसी (मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट निगम) के पास था। लेकिन मुफ्त में गुज़रने के कारण निगम को नुकसान हो रहा था। इसलिए 1 मार्च 2024 को निगम ने इस नाके को एक मुंबई स्थित निजी कंपनी को सौंप दिया। कंपनी की सख्ती के बाद से यहां विवाद की स्थितियां बनी हुई हैं।टोल कंपनी के सुपरवाइज़र दीपक दीघे ने अपनी शिकायत में बताया कि 4 मई, शनिवार को दशरथ राजौरिया, अन्नू बारौली और रवि ने उनसे मारपीट की। वह टोल पर बैठा था तभी गाड़ी नंबर MP09DF7574 वहां पहुंची।गाड़ी में बैठे दशरथ राजौरिया की कार पर फास्टैग नहीं लगा था। टोल काउंटर पर बैठी महिला कर्मचारी ने राजौरिया से नकद पैसे मांगे। इस पर राजौरिया नाराज हो गया और कहा कि गाड़ी मुफ्त में निकलेगी। इस पर महिला कर्मचारी ने सुपरवाइज़र दीपक दीघे से बात करने को कहा।
राजौरिया के साथ आए रवि और अन्नू बारौली ने दीघे से गाड़ी मुफ्त में छोड़ने को कहा। दीपक के मना करने पर उन्होंने उसकी कॉलर पकड़कर मारपीट की। कुछ देर बाद वे धमकियां देकर टोल से चले गए। इनके जाने के बाद दीपक ने टोल कंपनी के मैनेजर को पूरा घटनाक्रम बताया। इस बीच बदमाशों ने कार और वाणिज्यिक वाहनों की एक सूची टोल मैनेजर और सुपरवाइज़र को दी। उन्होंने कहा कि इस सूची में जो भी गाड़ियां हैं, उन्हें मुफ्त में छोड़ा जाए। नहीं तो वे कंपनी से टोल हटवा देंगे। इसके बाद दीपक ने बाणगंगा थाने जाकर तीनों आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।
Thank you for reading this post!
