इंदौर । सीमा शुल्क बढ़ने के बाद खाद्य तेलों के दाम में वृद्धि होने पर सरकार के साथ-साथ व्यापारिक संगठनों ने भी मुनाफाखोरों के विरुद्ध अभियान शुरू किया है। देश में लगभग दो महीने का तेल भंडार है। सरकार ने निर्देश दिए हैं कि त्योहारी मौसम में कीमतें न बढ़ाई जाएं। विशेषज्ञों का कहना है कि आयात शुल्क में वृद्धि का प्रभाव त्योहारी मौसम में नहीं पड़ेगा। करीब 45 दिनों का स्टॉक बंदरगाहों पर है। इसके अतिरिक्त लगभग 20 दिन का माल व्यापारियों के पास जमा है। इस प्रकार डेढ़ से दो महीने का भंडार देश में उपलब्ध है। अगले माह से नई फसल आना प्रारंभ हो जाएगी, जिससे इसका प्रभाव कम होगा। यदि त्योहारी मांग बढ़ती भी है तो तेलों के दाम 10 प्रतिशत से अधिक नहीं बढ़ेंगे। इसका सर्वाधिक लाभ किसानों को होगा, जब किसानों को लाभ होगा तो घरेलू उत्पादन बढ़ेगा। आयात कम होगा जो देश के लिए लाभदायक होगा।
तेलों पर आयात शुल्क बढ़ने के बाद देशभर में आयातकों ने पुराने स्टॉक में मुनाफाखोरी का खेल जोर-शोर से शुरू कर दिया है। कुछ आयातकों ने पाम तेल और सोया तेल की आपूर्ति जानबूझकर कम कर दी है, ताकि कुछ दिनों बाद ग्राहकों को आयात शुल्क जोड़कर माल लेने के लिए मजबूर किया जा सके, जबकि इस विषय में सरकार आयातकों को चेतावनी दे चुकी है। जो आयातक पुराने सौदे पूरे करने से इनकार कर रहे हैं, उनके विरुद्ध संगठन में शिकायत दर्ज कराएं। अवसर का लाभ उठाते हुए व्यापारियों ने कीमतों में भी वृद्धि करना आरंभ कर दिया है। ऐसे मुनाफाखोरों पर सरकार के साथ-साथ संगठन की भी नज़र है।”
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