इंदौर। एनीमिया वर्तमान में भारत में गर्भवती महिलाओं, किशोरियों और बच्चों के बीच तेजी से फैल रही एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। डॉ. एके द्विवेदी के अनुसार, शरीर में खून की कमी से व्यक्ति को थकान, चक्कर आना, कमजोरी, एकाग्रता में कमी और कार्यक्षमता में कमी जैसी परेशानियां होने लगती हैं। समय पर पहचान और उचित पोषण न मिलने पर यह समस्या और जटिल हो सकती है।
जागरूकता अभियान का शुभारंभ
समाज को जागरूक करने के उद्देश्य से “एनीमिया जागरूकता रथ” के माध्यम से एक व्यापक जन-जागरूकता अभियान शुरू किया जा रहा है। इसका शुभारंभ 17 फरवरी 2026 को इंदौर में होगा। इस अवसर पर मध्य प्रदेश के माननीय राज्यपाल मंगुभाई पटेल एनीमिया जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर अभियान का उद्घाटन करेंगे।
प्रमुख सहभागी
कार्यक्रम में इंदौर सांसद शंकर लालवानी, सम्माननीय विधायकगण, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर के कुलगुरु, डॉ. वैभव चतुर्वेदी, डॉ. कनक चतुर्वेदी, डॉ. अथर्व द्विवेदी, सरोज द्विवेदी, दीपक उपाध्याय एवं विनय पांडेय भी उपस्थित रहेंगे। ये सभी रथ यात्रा के संचालन में सहयोग करेंगे।
आयोजन विवरण
यह अभियान सांसद सेवा प्रकल्प इंदौर, आयुष मेडिकल वेलफेयर फाउंडेशन तथा एडवांस्ड होम्योपैथिक सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हो रहा है। फरवरी-मार्च में चलने वाले इस अभियान में चिकित्सा छात्र-छात्राएं और स्वयंसेवक घर-घर जाकर एनीमिया के लक्षण, कारण, बचाव और उपचार की जानकारी देंगे। विशेष रूप से लौह तत्वयुक्त आहार जैसे हरी सब्जियां, दालें, गुड़, चना और पौष्टिक भोजन पर जोर दिया जाएगा।
नेतृत्व और उद्देश्य
अभियान का संचालन वरिष्ठ होम्योपैथी चिकित्सक डॉ. ए.के. द्विवेदी के मार्गदर्शन में हो रहा है, जो देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद सदस्य और केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (आयुष मंत्रालय) के वैज्ञानिक सलाहकार मंडल से जुड़े हैं। होम्योपैथी के जरिए रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने और संतुलित उपचार पर मार्गदर्शन दिया जाएगा। अभियान का लक्ष्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक और उत्तरदायी बनाना है।
अपील और प्रभाव
आयोजकों का मानना है कि जागरूकता ही एनीमिया के खिलाफ सबसे कारगर हथियार है। रथ शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचकर जनसंवाद, परामर्श और स्वास्थ्य जानकारी प्रदान करेगा। मीडिया प्रतिनिधियों और समाज के सभी वर्गों से अपील है कि वे इस अभियान में भाग लें और स्वस्थ समाज निर्माण में योगदान दें। एनीमिया की अनदेखी भविष्य की पीढ़ियों के स्वास्थ्य को जोखिम में डाल सकती है, इसलिए चिकित्सा, पोषण और जागरूकता पर एक साथ कार्य करने की जरूरत है।
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