आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग पर राऊ से देवास तक का हिस्सा सबसे खराब हालत में है। यहां वाहन चालकों से 50 से 300 रुपये तक टोल वसूला जाता है और रोजाना कंपनी को 15 लाख से ज्यादा की आमदनी होती है, लेकिन बदले में यात्रियों को जाम और गड्ढों से भरी सड़क ही मिलती है। छह लेन निर्माण के दौरान पूरी सर्विस रोड और पर्याप्त ब्रिज नहीं बनाए गए थे, जिसकी खामियाजह अब भुगतनी पड़ रही है। फिलहाल 35 किलोमीटर के हिस्से में तीन नए ब्रिज एक साथ बनाए जा रहे हैं, लेकिन इसके चलते ट्रैफिक को सर्विस रोड पर डायवर्ट कर दिया गया है। गड्ढों से भरी इस सड़क पर वाहनों की रफ्तार बेहद धीमी हो जाती है और सुबह से शाम तक लंबा जाम लग जाता है।
इंदौर से भोपाल जाने वाले कई लोग अर्जुन बड़ौद के जाम से बचने के लिए वैकल्पिक मार्ग चुन रहे हैं, लेकिन मुंबई, नासिक, मालेगांव से होकर भोपाल, ग्वालियर या आगरा जाने वालों को इन्हीं परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है। मंत्री और सांवेर विधायक तुलसी सिलवाट ने भी इस मुद्दे पर अधिकारियों से दो बार बैठक की है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि ब्रिज का निर्माण तेजी से पूरा किया जाए और जहां ट्रैफिक डायवर्ट किया गया है, उस हिस्से को चौड़ा कर सुधार किया जाए ताकि बार-बार यातायात बाधित न हो।
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