प्रयागराज कुंभ को सजाने और संवारने में इंदौर का योगदान बेहद खास रहा। इंदौर के कलाकार महेंद्र कोडवानी और उनकी टीम ने केवल तीन महीने के भीतर शहर में 18 महापुरुषों की प्रतिमाएं तैयार कर स्थापित कीं। इसके अलावा, 1.50 लाख वर्गफुट क्षेत्र में दीवारों और सार्वजनिक स्थानों पर पेंटिंग करके अद्भुत कलाकृतियां उकेरीं। शहर के सभी मंदिरों में भी म्यूरल बनाए गए।

महेंद्र कोडवानी इंदौर से 30-35 लोगों की टीम लेकर गए थे। लेकिन जब उन्होंने परियोजना और समयसीमा का आकलन किया, तो यह चुनौती बेहद बड़ी लगी। ऐसे में उत्तर प्रदेश सरकार ने भी अतिरिक्त टीम उपलब्ध करवाई। कोडवानी के अनुसार, 1200 लोगों ने 24 घंटे शिफ्ट में काम किया। एक टीम ने प्रतिमाएं बनाई, दूसरी ने वॉल पेंटिंग और तीसरी ने म्यूरल पर काम किया।
इंदौर की टीम ने किए ये उल्लेखनीय काम:
- प्रतिमाएं:
- 35 फीट ऊंची दो प्रतिमाएं – एक में ऋषि वाल्मीकि को रामायण लिखते हुए और दूसरी में ब्रह्मा को यज्ञ करते हुए दर्शाया गया है। ये प्रतिमाएं अरैल क्षेत्र के शिवालय पार्क में स्थापित की गईं।
- 12 फीट ऊंची 16 अन्य प्रतिमाएं भी बनाई गईं, जिनमें मेजर ध्यानचंद, अर्जुन, तिरुवल्लुवर, रवींद्रनाथ टैगोर, सेवा करते पुलिसकर्मी, साधु-संत, शिव-शक्ति और राजा समुद्रगुप्त जैसी शख्सियतें शामिल हैं।
- वॉल पेंटिंग:
- 1.50 लाख वर्गफुट क्षेत्र में दीवारों पर देवी-देवताओं, ऋषियों, कलाकारों, और सांस्कृतिक कर्मियों की कलाकृतियां उकेरी गईं।
- मंदिरों में म्यूरल:
- शहर के सभी मंदिरों में म्यूरल्स तैयार किए गए।
कठिनाइयों के बावजूद टीम का काम जारी रहा
नवंबर में जब परियोजना अपने अंतिम चरण में थी, महेंद्र कोडवानी को हार्ट अटैक हुआ। इस कठिन समय में भी काम नहीं रुका। उनकी अनुपस्थिति में टीम ने अपना कार्य जारी रखा। कोडवानी को इंदौर लाया गया, जहां उनके पिता किशोर कोडवानी ने कुछ समय तक काम की देखरेख की। स्वास्थ्य में सुधार होने पर कोडवानी प्रयागराज लौटे और परियोजना को पूरा किया। अगले हफ्ते उनकी बायपास सर्जरी होने वाली है।
महेंद्र कोडवानी और उनकी टीम की यह मेहनत, प्रतिबद्धता और कला कौशल अद्वितीय है।
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