इंदौर: मध्य प्रदेश सरकार ने बड़ा निर्णय लेते हुए महापौर निधि से होने वाले विकास कार्यों पर रोक लगा दी है। इंदौर में इस निधि से हर वर्ष लगभग 10 करोड़ रुपये के काम कराए जाते थे। राज्य शासन ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि निगम के अधिनियम में महापौर निधि का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में अब महापौर किसी भी वार्ड में सीधे तौर पर विकास कार्य नहीं करा सकेंगे। पहले कई बार पार्षदों द्वारा काम नहीं करवाने की स्थिति में महापौर अपनी निधि से कार्य करा देते थे।
सभी नगर निगम आयुक्तों को जारी हुआ आदेश
नगरीय विकास एवं आवास विभाग के उप सचिव प्रमोद कुमार शुक्ला ने प्रदेश के सभी नगर निगम आयुक्तों को आदेश जारी किया है। आदेश में नगर निगमों के बजट में महापौर निधि का प्रावधान करने पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। शासन के अनुसार यह तथ्य सामने आया है कि कई नगर निगम अपने बजट में महापौर निधि का प्रावधान करते रहे हैं, जबकि मध्य प्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 के अध्याय-7 में नगर पालिका निधि के प्रावधानों का उल्लेख है और उसमें महापौर निधि का कोई उल्लेख नहीं है।
बताया गया कि वित्तीय वर्ष के बजट प्रस्ताव में निगम की आय और प्राप्तियों का अनुमान तो शामिल होता है, लेकिन महापौर निधि से संबंधित कोई वैधानिक प्रावधान नहीं है। इसलिए सभी निगम आयुक्तों को निर्देश दिए गए हैं कि बजट प्रस्ताव तैयार करते समय निगम अधिनियम तथा मध्य प्रदेश नगर पालिक निगम (लेखा एवं वित्त) नियम 2018 के अनुसार ही प्रक्रिया अपनाई जाए।
2026-27 के बजट में नहीं होगा प्रावधान
इस आदेश के बाद वित्तीय वर्ष 2026-27 के नगर निगम बजट में महापौर निधि का प्रावधान नहीं किया जाएगा। शासन के इस फैसले से इंदौर सहित प्रदेश के अन्य नगर निगमों के महापौरों के अधिकार सीमित हो जाएंगे, क्योंकि अब वे पार्षदों के अनुरोध पर सीधे किसी वार्ड में विकास कार्य नहीं करा सकेंगे।
पहले हर साल होता था 10 करोड़ का प्रावधान
अब तक नगर निगम के बजट में हर वर्ष लगभग 10 करोड़ रुपये महापौर निधि के रूप में रखे जाते थे। इस राशि का उपयोग महापौर अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार विभिन्न विकास कार्यों में करते थे। शासन द्वारा रोक लगाए जाने के बाद अब न तो बजट में यह राशि रखी जाएगी और न ही महापौर अपने स्तर पर काम स्वीकृत कर पाएंगे। निगम अधिकारियों के अनुसार बजट में महापौर निधि का प्रावधान लंबे समय से परंपरागत रूप से किया जाता रहा है।
इन कार्यों में होता था उपयोग
महापौर निधि से वार्डों में सड़क निर्माण, पानी की व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, ड्रेनेज, उद्यान और अन्य छोटे-बड़े विकास कार्य कराए जाते थे। कई बार महापौर अपनी प्राथमिकता के आधार पर पार्षदों के वार्डों में भी कार्य स्वीकृत करते थे, जिससे पार्षदों को भी राहत मिलती थी और स्थानीय विकास कार्य पूरे हो जाते थे।
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