खरगोन के एक मजदूर को काम के दौरान हुए भीषण हादसे के बाद डॉक्टरों ने नई जिंदगी दी। गले में लोहे का सरिया आरपार घुस जाने से गंभीर रूप से घायल 30 वर्षीय युवक को इंदौर के एमवाय अस्पताल लाया गया, जहां साढ़े तीन घंटे तक चली जटिल सर्जरी के बाद सरिया सफलतापूर्वक निकाला गया। खास बात यह रही कि सरिया ब्रेन को ऑक्सीजन पहुंचाने वाली नस और आहार नली के बेहद करीब फंसा हुआ था।
जानकारी के अनुसार, खरगोन निवासी 30 वर्षीय सद्दाम 1 अप्रैल की सुबह करीब 10:30 बजे काम के दौरान गिर पड़ा, जिससे लोहे का मोटा सरिया उसके गले में आरपार घुस गया। गंभीर हालत में परिजन उसे तुरंत इंदौर लेकर पहुंचे। अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने मामले की गंभीरता को समझते हुए इसे बेहद चुनौतीपूर्ण केस माना।
डॉक्टरों के मुताबिक, ऑपरेशन अत्यंत संवेदनशील था, जिसमें मिलीमीटर स्तर की सटीकता जरूरी थी। टीमवर्क और सावधानी के चलते मरीज की जान बचाई जा सकी।
सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. अरविंद शुक्ला ने बताया कि करीब 12 एमएम मोटा सरिया गर्दन के उस हिस्से में फंसा था, जहां से ब्रेन को ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली महत्वपूर्ण नस और आहार नली गुजरती है। उन्होंने कहा कि यदि ऑपरेशन के दौरान इनमें से किसी भी हिस्से को नुकसान पहुंचता, तो मरीज को लकवा हो सकता था या उसकी जान भी जा सकती थी।
डॉक्टरों की टीम ने सभी आवश्यक जांचों के बाद सर्जरी की विस्तृत योजना बनाई और करीब साढ़े तीन घंटे तक चले ऑपरेशन में सरिया को बेहद सावधानी से बाहर निकाला।
इस जटिल सर्जरी में डॉ. अविनाश गौतम, डॉ. उपेन्द्र पाण्डेय, डॉ. रामेंद्र गुर्जर और सीनियर रेजिडेंट डॉ. सुब्रजीत नायक सहित अन्य चिकित्सकों की अहम भूमिका रही। वहीं, एनेस्थीसिया विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. शालिनी जैन और उनकी इमरजेंसी टीम का योगदान भी सराहनीय रहा।
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