इंदौर: जब मस्तिष्क की रक्तवाहिनियां असामान्य तरीके से आपस में जुड़कर जाल बना लेती हैं, तो इस स्थिति को मेडिकल भाषा में ब्रेन आर्टेरियोवेनस मालफॉर्मेशन (एवीएम) कहा जाता है। इस अवस्था में रक्त का प्रवाह सामान्य मार्ग से न होकर सीधे गुजरता है, जिससे तेज सिरदर्द, दौरे और गंभीर मामलों में स्थायी नुकसान का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में समय पर सही उपचार और विशेषज्ञों की देखरेख बेहद महत्वपूर्ण होती है। एवीएम एक दुर्लभ जन्मजात वैस्कुलर समस्या है, जो दुनिया भर में लगभग हर एक लाख लोगों में से एक को प्रभावित करती है।
हाल ही में ऐसा ही एक जटिल मामला सामने आया, जिसमें 10 वर्षीय बच्ची लंबे समय से एवीएम से जूझ रही थी। उसे पहले तीन बार स्क्लेरोथेरेपी दी जा चुकी थी, लेकिन अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया। लगातार सिरदर्द और असहनीय पीड़ा के कारण उसकी पढ़ाई, खेलकूद और दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा था। स्थिति गंभीर होने पर परिजन उसे केयर सीएचएल हॉस्पिटल लेकर पहुंचे।
अस्पताल में विशेषज्ञों ने एमआरआई सहित विभिन्न जांचों के माध्यम से एवीएम की सटीक स्थिति और जटिलता का आकलन किया। इसके बाद एक विस्तृत उपचार योजना बनाकर सर्जरी का निर्णय लिया गया। प्लास्टिक सर्जन डॉ. प्राचीर मुकाती और वैस्कुलर सर्जन डॉ. रजत महेश्वरी ने सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया। पूरी प्रक्रिया के दौरान बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सौरभ पिपरसनिया की सतत निगरानी से उपचार सुरक्षित और प्रभावी तरीके से संपन्न हुआ।
डॉ. प्राचीर मुकाती ने बताया, “बच्चों में एवीएम एक चुनौतीपूर्ण स्थिति होती है, जिसमें समय पर सटीक निदान और विशेषज्ञ सर्जरी बेहद आवश्यक है। हम प्रत्येक मरीज के लिए व्यक्तिगत और समग्र उपचार योजना तैयार करते हैं, ताकि बेहतर और स्थायी परिणाम मिल सकें। इस मामले में बच्ची की स्थिति में सुधार देखना हमारे लिए संतोषजनक है।”
डॉ. रजत महेश्वरी के अनुसार, “एवीएम की जटिल संरचना और संवेदनशील लोकेशन सर्जरी को चुनौतीपूर्ण बनाती है। ऐसे मामलों में अत्यधिक सावधानी और सटीक योजना की जरूरत होती है, ताकि आसपास के स्वस्थ ऊतकों को नुकसान न पहुंचे। उन्नत तकनीक और टीमवर्क की मदद से हम सुरक्षित तरीके से एवीएम को हटाने में सफल रहे।”
वहीं, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सौरभ पिपरसनिया ने कहा, “बच्चों के जटिल मामलों में केवल सर्जरी ही नहीं, बल्कि संपूर्ण देखभाल भी जरूरी होती है। हमने हर चरण में बच्ची की स्थिति पर नजर रखी, जिससे उसकी रिकवरी सुचारु और सुरक्षित रही।”
सर्जरी के बाद बच्ची की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अब उसे सिरदर्द और तकलीफ से काफी राहत मिल चुकी है और वह धीरे-धीरे अपनी सामान्य दिनचर्या और स्कूल जीवन में लौट रही है। डॉक्टरों की निगरानी में उसकी रिकवरी संतोषजनक बनी हुई है। परिवार ने भी बच्ची के स्वास्थ्य में आए सुधार पर खुशी जताई है।
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में पहले इस तरह की जटिल वैस्कुलर सर्जरी की सुविधा सीमित थी, जिसके कारण मरीजों को बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था। अब केयर सीएचएल हॉस्पिटल, इंदौर में यह उन्नत सुविधा उपलब्ध है। अस्पताल ने अनुभवी वैस्कुलर और प्लास्टिक सर्जनों की टीम तैयार की है, जिससे क्षेत्र के मरीजों को अब बेहतर और आधुनिक उपचार यहीं मिल रहा है। हाल ही में डॉ. रजत महेश्वरी के सर गंगा राम अस्पताल, दिल्ली से जुड़ने के बाद यहां सेवाएं और मजबूत हुई हैं।
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