इंदौर । तीसरा नेशनल हिप कोर्स और इंडोकॉन-2026 23 जनवरी से शुरू हो रहा है। यह तीन दिवसीय आयोजन 25 जनवरी तक चलेगा, जिसमें देशभर के ऑर्थोपेडिक सर्जन, जॉइंट रिप्लेसमेंट विशेषज्ञ, रेजिडेंट डॉक्टर और रिसर्चर भाग लेंगे। कोर्स और कॉन्फ्रेंस हिप सर्जरी, ट्रॉमा केयर, आधुनिक तकनीकों तथा उभरती प्रैक्टिस पर केंद्रित होगी।
इंडोकॉन में पहली बार इंदौर में लेटेस्ट तकनीक और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता एक साथ नजर आएगी। कैडेवर कोर्स में 100 से अधिक डेलीगेट्स भाग लेंगे, जिसमें इंग्लैंड, साउथ कोरिया और कनाडा से तीन इंटरनेशनल फैकल्टी शामिल होंगी। यह हिप सर्जरी सीखने वाले किसी भी स्थानीय आयोजन में अब तक की सबसे बड़ी भागीदारी होगी।
कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन डॉ. हेमंत मंडोवरा ने कोर्स और कॉन्फ्रेंस के बारे में बताया कि इन तीन दिनों में शहर की ऑर्थोपेडिक और सर्जिकल क्षमता की प्रगति स्पष्ट दिखेगी। हमारा मुख्य फोकस ‘हिप प्रिजर्वेशन’ पर रहेगा, जो युवा मरीजों में प्राकृतिक जोड़ को सुरक्षित रखने में मदद करता है। इसके अलावा कॉम्प्लेक्स हिप रिप्लेसमेंट, रिवीजन आर्थ्रोप्लास्टी और रोबोटिक सर्जरी पर भी सेशन आयोजित किए गए हैं। संक्षेप में, यह सम्मेलन न केवल अकादमिक चर्चा का मंच है, बल्कि स्किल और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का महत्वपूर्ण अवसर भी प्रदान करेगा।
इसके साथ ही एआई आधारित हिप सर्जरी तकनीक पर विशेष सत्र होगा, जिसमें 3डी प्री-ऑपरेटिव प्लानिंग, इमेज-बेस्ड एनालिसिस, वर्चुअल मॉडलिंग और नेविगेशन सिस्टम का उपयोग कैसे सर्जरी को अधिक सटीक, सुरक्षित और मरीज-केंद्रित बनाता है—इस पर विशेषज्ञ विस्तार से चर्चा करेंगे। प्रैक्टिकल डेमोंस्ट्रेशन में आधुनिक सर्जिकल उपकरण, इम्प्लांट और नई प्रक्रियाओं का वास्तविक उपयोग दिखाया जाएगा, ताकि प्रतिभागी तकनीक की बारीकियों को करीब से समझ सकें। इन सभी कारणों से यह आयोजन इस बार अधिक व्यापक, टेक्नोलॉजी-प्रधान और अंतरराष्ट्रीय स्तर का होगा।

कॉन्फ्रेंस के सेक्रेटरी तथा लेप्रोस्कोपिक सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. अर्जुन जैन ने कहा, “हाल के वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं से हिप फ्रैक्चर के मामले लगातार बढ़े हैं। साथ ही जीवन प्रत्याशा बढ़ने से बुजुर्गों में हिप संबंधी समस्याएं और जटिलताएं तेजी से उभरी हैं। इसी कारण इस वर्ष हिप सर्जरी पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि आधुनिक तकनीकों और वैश्विक विशेषज्ञता को एक मंच पर लाकर बेहतर उपचार को बढ़ावा मिले। 23वीं इंडोकॉन का उद्देश्य पारंपरिक ऑर्थोपेडिक्स को नई तकनीकों से जोड़ना है। इस वर्ष पहली बार यूके से डॉ. मालवीया के साथ कैडेवर पर हिप आर्थ्रोस्कोपी का लाइव डेमोंस्ट्रेशन होगा, जो युवा सर्जनों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा। बड़ी संख्या में रेजिडेंट्स और कंसल्टेंट डॉक्टरों की भागीदारी से मानकीकृत उपचार बढ़ेगा और मरीजों को बेहतर परिणाम मिलेंगे।”
23 जनवरी को कार्यक्रम इरकाड इंडिया में कैडेवरिक वर्कशॉप से शुरू होगा, जहां सर्जनों को कॉम्प्लेक्स हिप सर्जरी की हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग मिलेगी। 24 और 25 जनवरी को ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में वैज्ञानिक सेशन होंगे। इनमें हिप प्रिजर्वेशन, मिनिमली इनवेसिव रिप्लेसमेंट, रिवीजन आर्थ्रोप्लास्टी, जटिल ट्रॉमा मैनेजमेंट तथा लेटेस्ट टेक्नोलॉजी पर विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा करेंगे। केस डिस्कशन और पैनल चर्चा भी सेशन का हिस्सा होंगी।
कोर्स कन्वेनर डॉ. अभिजीत पंडित ने बताया कि इस वर्ष वैज्ञानिक सेशन में बायोमैकेनिक्स, इम्प्लांट डिजाइन, रिसर्च-आधारित इनोवेशन और सर्जिकल टेक्नोलॉजी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। एओएसआई और हिप हेल्थ कमेटी (एचएचसी) द्वारा तैयार ये सेशन युवा सर्जनों को लेटेस्ट तकनीक और वैश्विक प्रैक्टिस से जोड़ेंगे। नई तकनीकों का परिचय, लाइव डेमो, साइंटिफिक सेशन, डिस्कशन तथा अनुभव-आधारित ट्रेनिंग इस कोर्स और कॉन्फ्रेंस की मुख्य विशेषताएं रहेंगी।
कॉन्फ्रेंस के साइंटिफिक चेयरमैन डॉ. एस.के. लुनावत ने कहा कि इस बार सम्मेलन की थीम “एवरीथिंग अराउंड हिप” रखी गई है। उन्होंने बताया कि इस थीम के तहत हिप से जुड़े सभी विषय जैसे कूल्हे की फ्रैक्चर सर्जरी, ऑर्थ्रोप्लास्टी आदि पर लेटेस्ट ट्रीटमेंट और टेक्नोलॉजी पर चर्चा होगी। इससे इंदौर और मध्य भारत के मरीजों को बेहतर उपचार विकल्प मिलेंगे तथा यह कॉन्फ्रेंस क्षेत्र के लिए लंबे समय तक लाभकारी साबित होगा।
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