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लोकोत्सव का आखिरी दिन आज; हफ्ते भर छाई रही कला और संस्कृति की धूम

Posted on December 31, 2024

इंदौर। लाल बाग पैलेस में आयोजित लोकोत्सव 2024 आज अपने अंतिम चरण में है। पिछले छह दिनों से चल रहे इस भव्य कला और शिल्प महोत्सव ने न केवल इंदौरवासियों बल्कि देशभर से आए पर्यटकों का भी मन मोह लिया। अनंत जीवन सेवा एवं शोध समिति द्वारा आयोजित इस महोत्सव में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए कलाकारों ने अपनी सांस्कृतिक और शिल्प विरासत का बेहतरीन प्रदर्शन किया। यहां कपड़ों, सजावट के सामान, पीतल की सुंदर मूर्तियों और बांस से बने खिलौनों ने दर्शकों को खूब आकर्षित किया। इस महोत्सव ने लोक कला और शिल्प को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय कलाकारों और कारीगरों को अपनी प्रतिभा दिखाने का एक अनूठा मंच प्रदान किया। छठे दिन बाड़मेर के मांगणियार और लंगा कला के लोक कलाकारों ने अपनी विशिष्ट प्रस्तुति से कार्यक्रम को यादगार बना दिया।

लोकोत्सव के कुछ खास आकर्षण

  • बांस की कलाकृतियाँ: बांस से बने उत्पाद अपनी सादगी और टिकाऊपन के कारण हर किसी को आकर्षित कर रहे हैं।
  • झूले और फर्नीचर: स्थानीय शिल्पकारों ने पर्यावरण के प्रति जागरूकता और आधुनिक डिज़ाइन का बेहतरीन मिश्रण पेश किया। बांस से बने हैंगिंग चेयर और टेबल सेट सबसे अधिक लोकप्रिय रहे।
  • दीवार सजावट: बांस की नक्काशी से बने वॉल आर्ट पीस पारंपरिक और समकालीन डिज़ाइन प्रेमियों का ध्यान खींचने में सफल रहे।
  • म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स: बांसुरी और तम्बूरा जैसे वाद्य यंत्र, जो सजावट और उपयोगिता दोनों में उत्कृष्ट हैं, संगीत प्रेमियों के बीच चर्चा में रहे।
  • पीतल की कलाकृतियाँ: पीतल से बनी कलाकृतियों ने अपने भव्य रूप और शानदार नक्काशी से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
  • धार्मिक मूर्तियाँ: गणेश, लक्ष्मी और सरस्वती की नक्काशीदार मूर्तियाँ दर्शकों के बीच विशेष रूप से पसंद की गईं।
  • घंटियाँ और दीपक: भारतीय संस्कृति की झलक देने वाले पीतल के पारंपरिक घंटे और सजावटी दीपक ने दर्शकों का दिल जीत लिया।
  • सजावटी शोपीस: आधुनिक डिज़ाइन वाले छोटे शोपीस, जैसे जानवरों की आकृतियाँ और पेपरवेट, ने युवाओं को खास तौर पर आकर्षित किया।
  • संगमरमर की कला: नक्काशी का जादू संगमरमर से बनी कृतियाँ अपनी सफेदी और नाजुक शिल्प कौशल के कारण सबसे अलग नजर आईं।
  • मूर्ति कला: बुद्ध, महावीर, और राधा-कृष्ण की संगमरमर मूर्तियाँ शांति और ध्यान का प्रतीक बनकर दर्शकों को मोहित करती रहीं।
  • घर सजावट: संगमरमर के पॉट, फूलदान, और वॉल पैनल्स अपनी चमक और बारीकी के लिए पसंद किए गए।
  • ताजमहल की प्रतिकृतियाँ: संगमरमर से बने लघु ताजमहल भारतीय वास्तुकला की उत्कृष्टता का प्रतीक बनकर दर्शकों को खूब भाए।

शिल्पकारों की प्रेरणादायक कहानियाँ

इन कलाकृतियों के पीछे छिपे शिल्पकारों की कहानियाँ भी दर्शकों को प्रभावित कर रही हैं। बांस से जुड़े आदिवासी शिल्पकार अपनी पीढ़ियों से चली आ रही कला की कहानी सुनाते हैं, जबकि पीतल और संगमरमर के शिल्पकार पारंपरिक तकनीकों और आधुनिक डिज़ाइन का संगम कर अपनी कला को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं।

दर्शकों ने इन कलाकृतियों की प्रशंसा करते हुए कहा, “यह सिर्फ कला नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध संस्कृति और शिल्प कौशल का प्रतीक है।”

आयोजकों का संदेश

महोत्सव के आयोजकों, अनंत जीवन सेवा एवं शोध समिति के श्री जय कुमरावत और सुश्री ज्योति कुमरावत ने कहा, “आज लोकोत्सव 2024 का समापन दिवस है। बीते छह दिनों में हमने अपने मेहमानों को सर्वश्रेष्ठ अनुभव प्रदान करने का प्रयास किया, और हमें खुशी है कि यह प्रयास सफल रहा। पीतल की मूर्तियां, बर्तन और कलाकृतियां लोगों को खूब पसंद आईं। वहीं, बांस से बने फर्नीचर और सजावट के सामान ने भी दर्शकों को खूब लुभाया। संगमरमर से बने आर्टिकल्स ने भी विशेष ध्यान आकर्षित किया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों, पारंपरिक व्यंजनों और विविध कार्यशालाओं ने इसे एक समग्र अनुभव बनाया।”

आयोजन की सफलता पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने आगे कहा, “जनता की शानदार प्रतिक्रिया हमारे प्रयासों को सार्थक बनाती है। अगले साल इसे और भी बड़े स्तर पर आयोजित करने की योजना है। लोकोत्सव 2024 ने यह सिद्ध कर दिया कि भारत की लोक कला और शिल्प आज भी लोगों के दिलों में गहरी जगह बनाए हुए हैं। इस आयोजन को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी का हृदय से आभार। विशेष धन्यवाद हमारे मेहमानों का, जिन्होंने इसे सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।”

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