केयर सीएचएल हॉस्पिटल्स में समय पर सर्जरी से बची मां और नवजात की जान
इंदौर। गर्भावस्था के दौरान यदि गर्भ में पल रहे शिशु की हलचल अचानक कम हो जाए तो इसे नजरअंदाज करना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। ऐसा ही एक मामला इंदौर के केयर सीएचएल हॉस्पिटल्स में सामने आया, जहां 34 सप्ताह की हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के दौरान समय पर लिए गए चिकित्सकीय निर्णय और विशेषज्ञों की टीम के समन्वित प्रयासों से मां और नवजात दोनों की जान सुरक्षित बचाई गई।
34 वर्षीय श्रीमती पुरोहित को लगातार दो-तीन दिनों तक गर्भ में शिशु की सामान्य से कम हलचल महसूस हुई। उन्होंने तुरंत केयर सीएचएल हॉस्पिटल्स में विशेषज्ञों से संपर्क किया। जांच में सामने आया कि उनकी गर्भावस्था पहले से ही अत्यंत जोखिमपूर्ण थी। चिकित्सकों ने बिना देरी किए इमरजेंसी सिजेरियन (एलएससीएस) करने का निर्णय लिया।
पहले भी हो चुके थे दो गर्भपात, थी रक्त संबंधी गंभीर बीमारी
अस्पताल के अनुसार, मरीज को पहले दो बार गर्भपात हो चुका था। साथ ही वह एंटीथ्रोम्बिन-III की कमी (थ्रोम्बोफिलिया) से पीड़ित थीं। इस स्थिति में खून के थक्के बनने की आशंका बढ़ जाती है, जिससे गर्भस्थ शिशु तक पर्याप्त रक्त, ऑक्सीजन और पोषण नहीं पहुंच पाता।
अल्ट्रासाउंड जांच में फिटल ग्रोथ रेस्ट्रिक्शन (FGR) की पुष्टि हुई, यानी गर्भ में शिशु का विकास सामान्य गति से नहीं हो रहा था। यही कारण था कि उसकी हलचल भी कम हो गई थी।
1.33 किलोग्राम की बच्ची का सुरक्षित जन्म
केयर सीएचएल हॉस्पिटल्स की सीनियर कंसल्टेंट गायनेकोलॉजी एवं लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. नीना अग्रवाल के नेतृत्व में विशेषज्ञ टीम ने इमरजेंसी एलएससीएस किया। सर्जरी के दौरान 1.33 किलोग्राम वजन की बच्ची का सुरक्षित जन्म हुआ। जन्म लेते ही बच्ची ने स्वयं रोना शुरू कर दिया, जो उसके स्वस्थ श्वसन का सकारात्मक संकेत था।
एनआईसीयू में मिला विशेषज्ञ उपचार
जन्म के बाद बच्ची को सीनियर कंसल्टेंट पीडियाट्रिक्स डॉ. मनीष जैन एवं उनकी एनआईसीयू टीम की निगरानी में रखा गया। शुरुआती 48 घंटे तक उसे सीपीएपी (CPAP) के जरिए श्वसन सहायता दी गई।
इलाज के दौरान बच्ची में नेक्रोटाइजिंग एंटेरोकोलाइटिस (NEC) जैसी जटिलता भी सामने आई, लेकिन विशेषज्ञों ने समय रहते उपचार शुरू कर दिया। लगातार निगरानी और इलाज से बच्ची की हालत में सुधार होता गया और जन्म के छठे दिन उसे मां के पास शिफ्ट कर दिया गया। अस्पताल से छुट्टी के समय वह पूरी तरह क्लीनिकली स्थिर थी और सामान्य रूप से दूध पी रही थी।
समय पर अस्पताल पहुंचना बेहद जरूरी : डॉ. नीना अग्रवाल

डॉ. नीना अग्रवाल ने बताया कि यदि गर्भावस्था के दौरान शिशु की हलचल अचानक कम महसूस हो तो इसे सामान्य मानकर अनदेखा नहीं करना चाहिए। विशेष रूप से जिन महिलाओं का पहले गर्भपात हो चुका हो, जिन्हें रक्त संबंधी बीमारी हो या जिनकी गर्भावस्था हाई रिस्क श्रेणी में आती हो, उन्हें नियमित जांच कराते रहना चाहिए। समय पर चिकित्सकीय सलाह और उपचार से मां एवं शिशु दोनों को गंभीर जटिलताओं
से सुरक्षित रखा जा सकता है।
समय से पहले जन्मे बच्चों को चाहिए विशेष निगरानी : डॉ. मनीष जैन
डॉ. मनीष जैन ने कहा कि समय से पहले जन्म लेने वाले और कम वजन वाले नवजातों को जन्म के बाद विशेषज्ञ देखभाल की आवश्यकता होती है। इस बच्ची को एनआईसीयू में लगातार मॉनिटरिंग, श्वसन सहायता और आवश्यक उपचार दिया गया, जिससे उसकी स्थिति में तेजी से सुधार हुआ और सुरक्षित डिस्चार्ज संभव हो सका।
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