इंदौर। मिताशा फाउंडेशन और डायोसिस ऑफ इंदौर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘संकल्प एक लाख अंगदान से जीवनदान’ जनजागरूकता अभियान में समाज के विभिन्न वर्गों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली। केरल समाजम, रोटरी क्लब ऑफ इंदौर आदर्श और एसवीडी सोसायटी के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में करीब 450 नागरिकों ने अंगदान के प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में चिकित्सक, शिक्षाविद, धर्मगुरु, सामाजिक कार्यकर्ता, युवा और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ, जहां वक्ताओं ने अंगदान को मानवता की सबसे बड़ी सेवा बताते हुए इसे जनआंदोलन बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
इस अभियान को सफल बनाने में डायोसिस ऑफ इंदौर के कैथोलिक बिशप थॉमस मैथ्यू की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके मार्गदर्शन में विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाओं को इस पहल से जोड़ा गया, जिससे अंगदान का संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सका।
मुख्य अतिथि इंदौर सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि देश में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना समय की सबसे बड़ी सामाजिक जरूरत है। उन्होंने नागरिकों से स्वयं अंगदान का संकल्प लेने और इस संदेश को हर परिवार तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने मिताशा फाउंडेशन और डायोसिस ऑफ इंदौर के इस प्रयास की सराहना भी की।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण केरल से आए फादर डेविस चेरमेल रहे, जिन्होंने अंगदान जागरूकता से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जागरूकता और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से हजारों लोगों को नया जीवन दिया जा सकता है।
इस अवसर पर पूर्व अधिष्ठाता एमजीएम मेडिकल कॉलेज डॉ. संजय दीक्षित, डॉ. शारदा, रेव. फादर पायस सिरिएक (एसवीडी) तथा मैथ्यू अब्राहम सहित अन्य अतिथियों ने भी संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने अंगदान से जुड़े भ्रम और मिथकों को दूर करने तथा समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने पर जोर दिया।
कार्यक्रम का सबसे भावुक सत्र वास्तविक जीवन के अनुभवों का रहा। अभिजीत राठौर ने अपनी बहन अभिजिता राठौर के अंगदान से जुड़ा अनुभव साझा किया, जबकि वेदिका आचार्य, जिन्होंने स्वयं किडनी दान की है, ने अंगदान के बाद मिलने वाले आत्मसंतोष और जीवन बचाने के महत्व को बताया।
मिताशा फाउंडेशन के आलोक सिंगी ने अपने दिवंगत पिता के नेत्र एवं त्वचा दान का अनुभव साझा करते हुए कहा कि अंग एवं ऊतक दान किसी व्यक्ति का जीवन का सबसे महान उपहार हो सकता है। उन्होंने बताया कि फाउंडेशन का लक्ष्य प्रदेशभर में जनजागरण अभियान चलाकर एक लाख अंगदान संकल्प प्राप्त करना है।
कार्यक्रम के दौरान सभी उपस्थित नागरिकों ने सामूहिक रूप से अंगदान जागरूकता को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने बताया कि एक अंगदाता आठ लोगों को नया जीवन दे सकता है, इसलिए अंगदान केवल एक निर्णय नहीं बल्कि मानवता के प्रति सबसे बड़ा योगदान है।
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों, सहयोगी संस्थाओं और स्वयंसेवकों का आभार व्यक्त किया गया। समापन अवसर पर एक स्वर में संदेश दिया गया कि “अंगदान महादान है। आपके जाने के बाद भी आपके अंग किसी अन्य व्यक्ति के जीवन में नई उम्मीद की किरण बन सकते हैं।”
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