इंदौर। ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में चौथी ब्रोंकोपल्मोनरी वर्ल्ड कांग्रेस 2026 की कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ हुआ। देश-विदेश से आए पल्मोनोलॉजिस्ट, क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ, थोरासिक सर्जन, मेडिकल रिसर्चर और युवा चिकित्सकों की उपस्थिति में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के पहले दिन फेफड़ों की बीमारियों के आधुनिक उपचार, नई रिसर्च और अत्याधुनिक तकनीकों पर विस्तृत चर्चा हुई। सम्मेलन में 700 से अधिक प्रतिनिधियों ने पंजीकरण कराया है।
कॉन्फ्रेंस के पहले दिन पल्मोनरी मेडिसिन, इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी, क्रिटिकल केयर, स्लीप मेडिसिन, पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन, थोरासिक सर्जरी और रेस्पिरेटरी रिसर्च जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए गए। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने फेफड़ों की जटिल बीमारियों के निदान और उपचार में हो रहे नवीनतम बदलावों, आधुनिक तकनीकों और अपने क्लिनिकल अनुभवों को प्रतिभागियों के साथ साझा किया। शाम 7 बजे आयोजित उद्घाटन समारोह में इंडेक्स ग्रुप के चेयरमैन श्री सुरेश सिंह भदोरिया, डॉ. राजेंद्र प्रसाद एवं डॉ. अतुल सी. मेहता ने कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया।
सम्मेलन में देशभर के विभिन्न मेडिकल संस्थानों से आए श्वसन रोग विभाग के 100 से अधिक पोस्ट ग्रेजुएट विद्यार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। वहीं 30 से अधिक टीमों ने पोस्ट ग्रेजुएट क्विज प्रतियोगिता में भाग लेकर अपनी अकादमिक एवं क्लिनिकल दक्षता का प्रदर्शन किया। रिसर्च पेपर, पोस्टर प्रेजेंटेशन, क्लिनिकल केस डिस्कशन और वैज्ञानिक संवाद के माध्यम से युवा चिकित्सकों को वरिष्ठ विशेषज्ञों से सीखने और अपने शोध साझा करने का महत्वपूर्ण अवसर मिला।
इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत के विभिन्न राज्यों के साथ अमेरिका, ब्रिटेन, नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश, मालदीव सहित कई देशों के विशेषज्ञों ने भाग लिया। पद्मश्री सम्मानित चिकित्सकों और अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी ने विभिन्न वैज्ञानिक सत्रों को संबोधित किया। इस अवसर पर अमेरिका में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले डॉ. अतुल सी. मेहता को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। विशेषज्ञों ने फेफड़ों की बीमारियों के उपचार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीकों, इंटरवेंशनल प्रक्रियाओं और मरीज-केंद्रित उपचार पद्धतियों की बढ़ती भूमिका पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।
कॉन्फ्रेंस के ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी प्रो. डॉ. रवि डोसी ने कहा कि बदलती जीवनशैली, बढ़ता वायु प्रदूषण, धूम्रपान, संक्रमण और एलर्जी आज फेफड़ों की बीमारियों के प्रमुख कारण बन चुके हैं। अस्थमा, सीओपीडी, फेफड़ों के संक्रमण और लंग कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि बीमारी के शुरुआती लक्षणों की समय रहते पहचान हो जाए और मरीज को उचित जांच एवं आधुनिक उपचार उपलब्ध हो, तो कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का भी प्रभावी उपचार संभव है। उन्होंने लोगों से धूम्रपान से दूर रहने, स्वच्छ वातावरण अपनाने, नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, समय पर टीकाकरण और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेने की अपील की।
डॉ. डोसी ने बताया कि पहले दिन आयोजित वैज्ञानिक सत्रों में विशेषज्ञों और प्रतिभागियों की उत्साहजनक भागीदारी रही। कोविड-19 के बाद उत्पन्न होने वाली श्वसन संबंधी जटिलताओं, टीबी के बाद फेफड़ों पर पड़ने वाले प्रभाव तथा पल्मोनरी हाइपरटेंशन जैसी गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान और वैज्ञानिक उपचार पर विशेष चर्चा की गई। साथ ही ब्रोंकोस्कोपी एवं नेविगेशन तकनीकों में हो रहे नवाचारों को फेफड़ों की बीमारियों के सटीक एवं शुरुआती निदान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया।
उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में पोस्ट ग्रेजुएट विद्यार्थियों ने अपने शोध कार्य प्रस्तुत किए और क्विज प्रतियोगिता में भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। ऐसे आयोजन चिकित्सा शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान और मरीजों की बेहतर देखभाल को नई दिशा प्रदान करते हैं। कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन भी विभिन्न वैज्ञानिक सत्र, क्लिनिकल केस डिस्कशन, विशेषज्ञ व्याख्यान और रिसर्च प्रेजेंटेशन आयोजित किए जाएंगे, जिनमें देश-विदेश के विशेषज्ञ फेफड़ों की बीमारियों के उपचार से जुड़े नवीनतम शोध, तकनीक और अनुभव साझा करेंगे।
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