हाईकोर्ट के निर्णय के बाद शुरू होगी कार्रवाई
इंदौर में बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (BRTS) हटाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। जबलपुर हाईकोर्ट ने इस विवादित मामले पर अपना फैसला सुना दिया है, जिससे शहर के परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव आने वाला है।
महापौर की घोषणा: कल से शुरू होगा काम
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने न्यायालय के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि BRTS कॉरिडोर को हटाने से शहर में यातायात सुगम होगा। उन्होंने यह भी बताया कि इस संरचना को हटाने का कार्य आज से ही आरंभ कर दिया जाएगा।
क्या था इंदौर का BRTS?
- निरंजनपुर से राजीव गांधी चौराहे तक 11.5 किलोमीटर लंबा था कॉरिडोर
- फिलहाल इस मार्ग पर 49 बसें संचालित हैं, जिनमें 29 सीएनजी और 20 डीजल बसें शामिल हैं
- डीजल बसों को इलेक्ट्रिक बसों से प्रतिस्थापित करने की योजना थी
- 2013 में लगभग 300 करोड़ रुपए की लागत से शुरू किया गया था यह प्रोजेक्ट
उपयोगिता की जांच
हाईकोर्ट ने BRTS की उपयोगिता और व्यवहारिकता की जांच के लिए IIM, IIT के विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिवक्ताओं की पांच सदस्यीय समिति गठित की थी। इससे पहले 2013 में भी इस परियोजना की समीक्षा की गई थी।
मुख्यमंत्री का पहले से था बयान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले ही BRTS हटाने की बात कह चुके थे। उनका कहना था कि इस व्यवस्था से नागरिकों को परेशानी हो रही है और सरकार न्यायालय में अपना पक्ष मजबूती से रखेगी।
मध्य प्रदेश का अंतिम BRTS भी होगा समाप्त
इंदौर का BRTS मध्य प्रदेश का एकमात्र ऐसा कॉरिडोर था, क्योंकि भोपाल में पिछले वर्ष ही इसे हटा दिया गया था। भोपाल में इस परियोजना पर 360 करोड़ रुपए का व्यय हुआ था।
इंदौरवासियों के लिए यह निर्णय एक नए यातायात युग की शुरुआत माना जा रहा है, जिसे लेकर शहरवासियों में मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखी जा सकती हैं।
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