दूषित पानी बन रहा किडनी का दुश्मन, हर 10 में से 1 मरीज इससे पीड़ित
Posted on March 12, 2026
भागीरथपुरा जल त्रासदी ने खोली आंखें, विशेषज्ञों ने दी चेतावनी
इंदौर। शहर में दूषित पानी की समस्या अब केवल पेट दर्द या दस्त तक सीमित नहीं रही — यह धीरे-धीरे किडनी को भी खोखला कर रही है। भागीरथपुरा में हुए दूषित जल कांड ने इस खतरे की गंभीरता को एक बार फिर उजागर कर दिया है, जहां 36 लोगों की मौत के बाद जांच में सामने आया कि अधिकांश मरीजों की किडनी भी बुरी तरह प्रभावित थी।
किडनी रोग विशेषज्ञों के अनुसार अस्पताल में आने वाले हर 10 किडनी मरीजों में से 1 मरीज सीधे तौर पर दूषित पानी की वजह से बीमार पड़ा होता है। चिंताजनक बात यह है कि लगभग 90 प्रतिशत मरीजों को शुरुआत में पता ही नहीं चलता कि उनकी किडनी खराब हो रही है।
कैसे पहुंचता है दूषित पानी किडनी तक?
दूषित पानी में मौजूद कोलेरा और ई-कोलाई जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पहले आंतों में संक्रमण करते हैं। इसके बाद यह बैक्टीरिया खून के रास्ते किडनी तक पहुंच जाते हैं और वहां सूजन व संक्रमण पैदा कर देते हैं। यदि समय पर इलाज न हो तो किडनी धीरे-धीरे काम करना बंद कर देती है और मरीज को डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की नौबत आ जाती है।
डायबिटीज के मरीज सबसे ज्यादा खतरे में
विशेषज्ञों की मानें तो मधुमेह से पीड़ित करीब 40 प्रतिशत मरीजों में पहले से किडनी रोग होने का जोखिम रहता है। ऐसे में अगर वे दूषित पानी पीते हैं या किसी संक्रमण की चपेट में आते हैं, तो उनके लिए स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है।
बिना डॉक्टर की सलाह दवाएं लेना भी है बड़ा कारण
डॉक्टरों ने यह भी चेताया कि बड़ी संख्या में लोग बीमार होने पर सीधे मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदकर खा लेते हैं। बिना परामर्श के ली गई दवाएं किडनी पर गहरा असर डालती हैं और लंबे समय में यह किडनी फेल होने का बड़ा कारण बन सकती हैं।
इंदौर में 3 हजार से ज्यादा मरीज ट्रांसप्लांट के इंतजार में
शहर में किडनी के गंभीर मामले लगातार बढ़ रहे हैं। अब तक 88 किडनी डोनेशन हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद 3 हजार से अधिक मरीज ट्रांसप्लांट की प्रतीक्षा सूची में हैं। अंगदान को लेकर जागरूकता की भारी कमी इस संकट को और गहरा कर रही है।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
किडनी रोग के शुरुआती संकेतों में थकान, पैर-हाथ में सूजन, भूख न लगना, पेशाब में बदलाव या खून आना, त्वचा में खुजली, सिरदर्द, रात में बार-बार पेशाब आना और मांसपेशियों में ऐंठन शामिल हैं। इन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
विशेषज्ञों की सलाह — इन बातों का रखें ध्यान
साफ और उबला या फिल्टर किया हुआ पानी ही पीएं। रोज कम से कम तीन लीटर पानी पिएं, संतुलित आहार लें, वजन नियंत्रित रखें, धूम्रपान से बचें, बिना डॉक्टर की सलाह कोई भी दवा न लें और 40 साल की उम्र के बाद साल में एक बार किडनी की जांच जरूर करवाएं।
“हमारे पास आने वाले 10 प्रतिशत मरीज दूषित पानी के कारण किडनी रोग से पीड़ित होते हैं। अव्यवस्थित जीवनशैली भी इसका बड़ा कारण है।” — डॉ. जय अरोरा, किडनी रोग विशेषज्ञ मेदांता हॉस्पिटल इंदौर
“40 वर्ष के बाद हर व्यक्ति को एक बार किडनी की जांच अवश्य करानी चाहिए।” — डॉ. अर्पित नीमा, केयर हॉस्पिटल इंदौर किडनी रोग विशेषज्ञ