इंदौर। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के संयुक्त सचिव डॉ. जीएस चौहान ने कहा कि भारत में राजनीति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व सीमित है, जबकि नेपाल (33%), अफगानिस्तान (27%), पाकिस्तान (20%) और बांग्लादेश (21%) में यह अधिक है। उन्होंने यह विचार देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्ययनशाला में ‘भारत के नवनिर्माण में महिलाओं का योगदान’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में व्यक्त किए।
डॉ. चौहान ने कहा कि प्राचीन काल से लेकर आधुनिक युग तक भारतीय महिलाओं ने शिक्षा, राजनीति, विज्ञान, चिकित्सा और सामाजिक सुधारों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, सावित्रीबाई फुले, सरोजिनी नायडू जैसी विभूतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं की भूमिका को भी रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’, ‘उज्ज्वला योजना’, ‘सुकन्या समृद्धि योजना’ जैसी योजनाएं महिलाओं के उत्थान के लिए चलाई जा रही हैं। महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों में सुधार आवश्यक है। उन्होंने लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ड्राइविंग, तैराकी और खाना बनाना सीखने की सलाह दी।
संगोष्ठी में विभागाध्यक्ष डॉ. सोनाली नरगुंदे ने कहा कि नारीवाद को भारतीय संदर्भ में देखने की जरूरत है। भारतीय नारी सशक्त रही है और घर-परिवार की नींव वही संभालती है। कार्यक्रम का संचालन प्रथमेश व्यास ने किया, और अंत में आईएमएस की विभागाध्यक्ष डॉ. संगीता जैन ने आभार व्यक्त किया।
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