मध्य प्रदेश में अगस्त से प्रीपेड बिजली व्यवस्था की शुरुआत की जा रही है
इस व्यवस्था का उद्देश्य बिजली खपत पर नियंत्रण रखना, बिल भुगतान में पारदर्शिता लाना और डिफॉल्ट की समस्या को कम करना है। उपभोक्ता अपनी जरूरत और बजट के अनुसार रिचार्ज कर सकेंगे, जिससे उन्हें बिजली उपयोग का बेहतर नियंत्रण मिलेगा। साथ ही, बिजली कंपनियों को भी राजस्व संग्रह में आसानी होगी, क्योंकि यह अग्रिम भुगतान आधारित प्रणाली है। राज्य सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से बिजली क्षेत्र में सुधार आएगा और उपभोक्ताओं को भी लाभ होगा
नई प्रीपेड बिजली व्यवस्था को लागू करने के लिए राज्य सरकार ने तकनीकी स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। स्मार्ट मीटर की बड़ी संख्या में खरीद और इंस्टॉलेशन की प्रक्रिया तेज़ की जा रही है। इन मीटरों को मोबाइल ऐप या ऑनलाइन पोर्टल के ज़रिए रिचार्ज किया जा सकेगा, जिससे उपभोक्ताओं को लाइन में लगने या देर से बिल जमा करने की झंझट नहीं होगी। साथ ही, उपभोक्ता अपने बिजली उपयोग की निगरानी भी वास्तविक समय (real-time) में कर सकेंगे। इससे उन्हें अनावश्यक खपत का अंदाज़ा लगाकर ऊर्जा बचाने में मदद मिलेगी।
हालांकि, इस नई व्यवस्था को लेकर कुछ चिंताएं भी सामने आ रही हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां डिजिटल साक्षरता और इंटरनेट सुविधा सीमित है, वहां उपभोक्ताओं को शुरुआत में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। इसके समाधान के लिए सरकार द्वारा जनजागरूकता अभियान चलाने और उपयुक्त सहायता केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है। साथ ही, शुरुआत में कुछ समय तक प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों विकल्प उपलब्ध रह सकते हैं ताकि उपभोक्ता सहज रूप से बदलाव को अपना सकें।
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