इंदौर। महात्मा गांधी और विनोबा भावे के विचारों से प्रेरित स्व. श्री मोरेश्वर वामन मोघे, जिन्हें स्नेहपूर्वक ‘दादा सा’ के नाम से जाना जाता था, अपने आदर्शों, समाजसेवा और मानवीय मूल्यों के लिए सदैव स्मरणीय रहेंगे। उनकी 21वीं पुण्यतिथि के अवसर पर पागनिसपागा स्थित बाल निकेतन संघ में अंतर्विद्यालयीन सामूहिक भजन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में शहर के 21 विद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए भक्ति संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं।
प्रतियोगिता में न्यू दिगंबर पब्लिक स्कूल ने प्रथम, क्रिश्चियन एमिनेंट स्कूल ने द्वितीय और छत्रपति शिवाजी पब्लिक स्कूल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं, वैष्णव एकेडमी को प्रथम और पिंक फ्लावर स्कूल को द्वितीय सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया। बाल निकेतन संघ की सचिव डॉ. नीलिमा अदमणे, प्राचार्य श्री संदीप धाकड़ एवं मुख्य अतिथियों ने विजेताओं और प्रतिभागियों को पुरस्कार व स्मृति चिह्न भेंट कर उनका उत्साहवर्धन किया।

भजनों की प्रस्तुतियों से भक्तिमय हुआ वातावरण
प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने ‘पालकी चलो उठाए’, ‘चदरिया झीनी रे झीनी’, ‘राम राम श्रीराम’, ‘जय हनुमान’, ‘मैली चादर ओढ़ के’, ‘आ जाइयो’, ‘करुणा के तुम सागर’ और ‘राम भजन कर’ जैसे भजनों की प्रस्तुतियां दीं। विद्यार्थियों ने सुर, ताल, लय और आपसी समन्वय के साथ सामूहिक गायन के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इन प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में भक्तिमय वातावरण निर्मित किया।
इस आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपनी संगीत प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए मंच उपलब्ध कराने के साथ ही भारतीय संस्कृति, भक्ति संगीत और पारंपरिक मूल्यों से जोड़ना रहा। सामूहिक गायन के माध्यम से विद्यार्थियों ने अनुशासन, एकाग्रता और टीम भावना का भी परिचय दिया।

निर्णायक मंडल ने सराही विद्यार्थियों की प्रस्तुतियां
प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में शास्त्रीय गायिका श्रीमती रसिका गावड़े, गायक एवं संगीतकार मयंक कुमार स्वर्णकार तथा सरोद वादक चिन्मय विंचुरकर शामिल रहे। निर्णायकों ने गायन की गुणवत्ता, सुर-ताल, लय, सामूहिक समन्वय और प्रस्तुति के आधार पर प्रतिभागियों का मूल्यांकन किया।
निर्णायक मंडल ने संयुक्त रूप से कहा, “सामूहिक भजन गायन विद्यार्थियों में संगीत की समझ विकसित करने के साथ अनुशासन, एकाग्रता और आपसी समन्वय की भावना को भी मजबूत करता है। ऐसे आयोजन बच्चों को भारतीय संस्कृति और भक्ति संगीत की समृद्ध परंपरा से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों में उत्साह और संगीत के प्रति समर्पण देखने को मिला।”
दादा सा के आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की पहल
बाल निकेतन संघ की सचिव डॉ. नीलिमा अदमणे ने कहा, “स्वर्गीय श्री मोरेश्वर वामन मोघे दादा सा की स्मृति में आयोजित यह प्रतियोगिता उनके प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। बाल निकेतन संघ का उद्देश्य विद्यार्थियों को मंच प्रदान करने के साथ उन्हें भारतीय संस्कृति, भक्ति संगीत और संस्कारों से जोड़ना भी है। दादा सा की स्मृति को सहेजते हुए हम चाहते हैं कि नई पीढ़ी हमारी संगीत परंपरा को समझे, उसका सम्मान करे और उसे आगे बढ़ाए। सामूहिक भजन गायन बच्चों में अनुशासन, एकाग्रता और एकजुटता की भावना विकसित करता है। प्रतियोगिता में शामिल सभी विद्यार्थियों का उत्साह सराहनीय रहा।”
बाल निकेतन संघ में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम दादा सा के विचारों और आदर्शों को स्मरण करने के साथ विद्यार्थियों में सांस्कृतिक चेतना, मानवीय मूल्यों और भारतीय संगीत परंपरा के प्रति सम्मान विकसित करने का प्रयास है।
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