इंदौर। आज की व्यस्त जीवनशैली में सिरदर्द, तनाव, भूलने की आदत, चिड़चिड़ापन और लगातार थकान जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। अधिकांश लोग इन्हें सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कई बार यही लक्षण किसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी, विशेषकर ब्रेन ट्यूमर, का संकेत भी हो सकते हैं। हाल ही में मनाए गए विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस के संदर्भ में विशेषज्ञों ने लोगों से मस्तिष्क संबंधी लक्षणों को गंभीरता से लेने की अपील की है।
मेदांता सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, इंदौर के इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज के डायरेक्टर डॉ. रजनीश कछारा ने बताया कि मस्तिष्क शरीर का सबसे महत्वपूर्ण नियंत्रण केंद्र है। सोचने, बोलने, चलने, देखने, सुनने और निर्णय लेने जैसी सभी गतिविधियां मस्तिष्क द्वारा नियंत्रित होती हैं। जब मस्तिष्क में असामान्य कोशिकाओं की वृद्धि होने लगती है, तो उसे ब्रेन ट्यूमर कहा जाता है। यह कैंसरयुक्त या गैर-कैंसरयुक्त दोनों प्रकार का हो सकता है, लेकिन दोनों ही स्थितियों में यह मस्तिष्क की सामान्य कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकता है।
डॉ. कछारा के अनुसार ब्रेन ट्यूमर की सबसे बड़ी चुनौती इसके शुरुआती लक्षण हैं, जो अक्सर सामान्य बीमारियों जैसे दिखाई देते हैं। कई लोग लंबे समय तक सिरदर्द को माइग्रेन या तनाव का परिणाम मानकर उपचार लेते रहते हैं। ऐसे में बीमारी का पता देर से चलता है और तब तक ट्यूमर का आकार बढ़ चुका होता है। उन्होंने कहा कि यदि सिरदर्द लगातार बढ़ रहा हो, विशेषकर सुबह के समय अधिक हो, बिना कारण उल्टी हो रही हो, बार-बार चक्कर आ रहे हों, अचानक दौरे पड़ रहे हों, आंखों की रोशनी कम हो रही हो या दो-दो दिखाई देता हो, तो तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
उन्होंने बताया कि बोलने में कठिनाई, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी या सुन्नपन, संतुलन बिगड़ना, व्यवहार में अचानक बदलाव और याददाश्त कमजोर होना भी ब्रेन ट्यूमर के संभावित संकेत हो सकते हैं। यदि स्मरण शक्ति में लगातार गिरावट आ रही हो और उसके साथ अन्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण भी मौजूद हों, तो चिकित्सकीय जांच आवश्यक है।
विशेषज्ञों के अनुसार ब्रेन ट्यूमर किसी भी आयु वर्ग को प्रभावित कर सकता है। बच्चों में बार-बार उल्टी, पढ़ाई में ध्यान न लगना, सिरदर्द और चलने में असंतुलन इसके संकेत हो सकते हैं। वहीं युवाओं में लगातार सिरदर्द, दृष्टि संबंधी समस्याएं और दौरे पड़ना चेतावनी का संकेत माना जाता है। बुजुर्गों में भूलने की बीमारी, व्यक्तित्व में बदलाव और शारीरिक कमजोरी के रूप में इसके लक्षण सामने आ सकते हैं।
विश्व स्तर पर भी ब्रेन और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र से जुड़े कैंसर गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बने हुए हैं। ग्लोबल कैंसर ऑब्जर्वेटरी (GLOBOCAN 2022) के अनुसार वर्ष 2022 में दुनिया भर में मस्तिष्क और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र कैंसर के करीब 3.22 लाख नए मामले दर्ज किए गए, जबकि लगभग 2.48 लाख लोगों की मौत इस बीमारी के कारण हुई।
मेदांता सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, इंदौर के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. संजय गीद ने कहा कि पिछले एक दशक में न्यूरोसर्जरी और न्यूरो-ऑन्कोलॉजी के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। आधुनिक एमआरआई, सीटी स्कैन, न्यूरोनेविगेशन सिस्टम, माइक्रोस्कोपिक और एंडोस्कोपिक ब्रेन सर्जरी जैसी उन्नत तकनीकों की मदद से अब ट्यूमर का अधिक सटीक निदान और सुरक्षित उपचार संभव हो पाया है। इसके चलते कई मरीज सफल इलाज के बाद सामान्य जीवन जी रहे हैं।
डॉ. कछारा ने परिवार की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि कई बार मरीज स्वयं अपने व्यवहार या स्मृति में हो रहे बदलावों को नहीं पहचान पाता, लेकिन परिवार के सदस्य इन संकेतों को जल्दी समझ सकते हैं। यदि किसी व्यक्ति के स्वभाव में अचानक बदलाव आ रहा हो, वह सामान्य बातें भूलने लगा हो या रोजमर्रा के कार्यों में कठिनाई महसूस कर रहा हो, तो इसे केवल तनाव या उम्र का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस का उद्देश्य केवल बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाना नहीं, बल्कि लोगों को यह संदेश देना भी है कि समय पर जांच और उपचार से मरीज के जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाई जा सकती है। “मस्तिष्क की हर चेतावनी को सुनिए, क्योंकि समय पर लिया गया निर्णय जीवन बचा सकता है।”
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