इंदौर में शुक्रवार को सोलहवें वित्त आयोग के सदस्यों ने शहर का दौरा किया। उन्होंने स्वच्छता व्यवस्था और ट्रेंचिंग ग्राउंड का निरीक्षण किया और इंदौर के स्वच्छता मॉडल की सराहना की। आयोग के सदस्यों ने कहा, “हमने कभी नहीं सोचा था कि कचरा भी सुंदर हो सकता है। इंदौर में स्वच्छता के क्षेत्र में वास्तव में बेहतरीन कार्य हुआ है।”
शहर में हुए विकास कार्यों और सरकारी ग्रांट्स के उपयोग को लेकर सदस्य एनी जॉर्ज मैथ्यू, मनोज पांडा, डॉ. सौम्य कांति घोष और ऋत्विक पांडे ने संतोष व्यक्त किया। एनी जॉर्ज मैथ्यू ने कहा, “इंदौर को मिले अनुदानों का जिस तरह से उपयोग किया गया, वह प्रशंसनीय है और यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी आदर्श बन सकता है।”
बैठक के दौरान, विभिन्न क्षेत्रों के प्रबुद्ध नागरिकों ने आयोग के सदस्यों को सुझाव भी दिए, जिन पर विचार करने की बात कही गई। ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित बैठक में एनी जॉर्ज मैथ्यू ने इंदौर की प्रशासनिक प्रणाली की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह एक अनूठा शहर है, जहां सरकार, निजी क्षेत्र और नागरिक मिलकर विकास कार्यों को आगे बढ़ाते हैं।

इस दौरान, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अपने चिर-परिचित मजाकिया अंदाज में कहा, “आयोग को विकास कार्यों के लिए और अधिक धनराशि देनी चाहिए, आखिर कब तक हम जनता की जेब काटते रहेंगे?” उनके इस बयान पर हॉल ठहाकों से गूंज उठा। विजयवर्गीय ने यह भी कहा कि “इंदौर को संवारने में जनता और बुद्धिजीवियों का बड़ा योगदान है। प्रशासनिक टीम का सहयोग भी उत्कृष्ट रहा है, और हमारी ब्यूरोक्रेसी में कोई अहंकार नहीं है।”
मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि “इंदौर को देश के सबसे स्वच्छ शहरों में बनाए रखना बड़ी चुनौती है। अब इंदौर टेक-ऑफ की स्थिति में है। जैसे बैंगलोर और हैदराबाद ग्रीन मोबिलिटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटलीकरण में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, उसी तरह इंदौर भी भविष्य का स्मार्ट शहर बनने की ओर अग्रसर है।”
सांसद शंकर लालवानी ने इंदौर के विकास के लिए हवाई सेवाओं के विस्तार की आवश्यकता पर जोर देते हुए आयोग से आग्रह किया कि “इंदौर के लिए नई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर विशेष सब्सिडी दी जाए।”
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