इंदौर में विशेषज्ञों ने जताई गहरी चिंता
- लंग केयर फाउंडेशन के कॉन्क्लेव में चिकित्सकों ने एकजुट होकर माँगा स्वच्छ वायु का अधिकार
इंदौर। बढ़ते वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के मानव स्वास्थ्य पर पड़ते गंभीर दुष्प्रभावों को लेकर इंदौर में एक महत्वपूर्ण विशेषज्ञ सम्मेलन का आयोजन किया गया। लंग केयर फाउंडेशन द्वारा आयोजित “एयर क्वालिटी एंड क्लाइमेट चेंज कॉन्क्लेव” में शहर के वरिष्ठ चिकित्सकों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने एक मंच पर आकर प्रदूषण की बिगड़ती स्थिति पर गहन मंथन किया। डॉ. सलील भार्गव ने वायु गुणवत्ता एवं जलवायु परिवर्तन के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले बहुआयामी प्रभावों को विस्तारपूर्वक रेखांकित किया।
डॉ. माधव हसानी ने “एयर पॉल्यूशन एंड पब्लिक हेल्थ” विषय पर बोलते हुए सरकारी नीतियों, शासन की रणनीतियों और उनके क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डाला। डॉ. रुपेश मोदी ने वायु प्रदूषण को ‘पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी’ घोषित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए IMA और चिकित्सक समुदाय की उत्तरदायित्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।
सम्मेलन के दौरान एक जागरूकता वीडियो एवं जागरूकता पोस्टर का विधिवत अनावरण किया गया। ये सामग्री चिकित्सकों के क्लिनिक व अस्पतालों में प्रदर्शित की जाएगी, जिससे प्रतीक्षारत मरीज और उनके परिजन वायु प्रदूषण के खतरों के प्रति सचेत हो सकें।
कार्यक्रम के केंद्रबिंदु पैनल चर्चा का संचालन लंग केयर फाउंडेशन के संस्थापक एवं ट्रस्टी डॉ. राजीव खुराना ने किया। इस चर्चा में डॉ. रुपेश मोदी, डॉ. राजकुमार सिसोदिया, डॉ. दिलीप चावड़ा, डॉ. शैलेश अग्रवाल एवं डॉ. त्रिपाठी ने सहभागिता की। सभी विशेषज्ञों ने एकमत से कहा कि वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए सरकार, चिकित्सा जगत, नागरिक समाज और उद्योग जगत को एकजुट होकर काम करना होगा।
इस अवसर पर IMA (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन), इंडियन चेस्ट सोसायटी, GPA एवं NIMA से जुड़े चिकित्सकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। कार्यक्रम का समापन लंग केयर फाउंडेशन की डिप्टी डायरेक्टर डॉ. कार्मिन उप्पल के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
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