इंदौर को सोमवार को पहली फूड एंड ड्रग लैब की सौगात मिली। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसका लोकार्पण किया। इस लैब के शुरू होने से अब शहर में खाद्य सामग्री और दवाओं के सैंपल की जांच के लिए उन्हें भोपाल नहीं भेजना पड़ेगा। इससे जांच रिपोर्ट पहले से कहीं तेज और सटीक तरीके से उपलब्ध हो सकेगी। सीएम यादव ने इसके साथ नंदानगर स्थित गोल स्कूल प्रांगण में कथा में भाग लिया और बरसाना गार्डन व ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित अन्य कार्यक्रमों में भी शामिल हुए।
लोकार्पण समारोह के चलते ट्रैफिक पुलिस ने शहर में डायवर्शन प्लान लागू किया। सिंगापुर टाउनशिप की ओर जाने वाले मार्ग के लेफ्ट टर्न को अस्थायी रूप से बंद किया गया, जबकि देवास नाका से लसूड़िया की ओर आने वाले वाहनों को वैकल्पिक मार्ग से भेजा गया। पंचवटी के गेट नंबर 1 से बड़े वाहनों की एंट्री पर भी रोक लगाई गई, ताकि समारोह स्थल के आसपास यातायात सुचारू रहे।
नई फूड एंड ड्रग लैब में जांच अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार की जाएगी। यहां लगाए गए सभी उपकरण भारतीय खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण (FSSAI) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप हैं। लैब में फूड और ड्रग सैंपल की रिपोर्ट अब स्थानीय स्तर पर ही तैयार होगी, जिससे खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित करने में तेजी आएगी। इससे मिलावटखोरी पर भी नियंत्रण में मदद मिलेगी और उपभोक्ताओं को शुद्ध खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने में प्रशासन को बड़ी सुविधा होगी।
इस परियोजना की नींव 2019 में देवास नाका के पास तलावली चांदा में रखी गई थी और अगस्त 2020 में इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ था। लगभग ₹8.30 करोड़ की लागत से बनी इस लैब को 2022 तक पूरा होना था, लेकिन कोविड महामारी, आचार संहिता और विभागीय देरी के कारण परियोजना में कई बार अड़चनें आईं। इसके बाद एनएबीएल मान्यता मिलने में भी विलंब हुआ, जिससे परीक्षण कार्य शुरू नहीं हो सका। अब इसके शुरू होने से इंदौर और आसपास के जिलों में खाद्य एवं औषधि जांच से जुड़ी प्रक्रियाएं काफी सुगम हो जाएंगी।
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