इंदौर। देश में स्वच्छता का लगातार आठ वर्षों से नेतृत्व कर रहा इंदौर अब एक बार फिर स्वच्छ सर्वेक्षण की तैयारी में जुट गया है। इस बार सर्वे में कचरा पृथकीकरण को विशेष महत्व देते हुए इसके लिए एक हजार अंक निर्धारित किए गए हैं। मई के अंतिम सप्ताह में शहर पहुंचने वाली सर्वे टीम यह जांच करेगी कि नागरिक अपने घरों से निकलने वाले कचरे को छह अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित कर कचरा संग्रहण वाहन को दे रहे हैं या नहीं। यदि यह व्यवस्था सही पाई जाती है, तो इंदौर को पूरे अंक मिल सकते हैं। साफ है कि नागरिकों की छोटी-छोटी जागरूक पहल ही शहर को देश का सबसे स्वच्छ शहर बनाए रखने में निर्णायक साबित होगी।
डोर-टू-डोर होगी जांच
कचरा पृथकीकरण की वास्तविक स्थिति जानने के लिए सर्वे टीम डोर-टू-डोर निरीक्षण करेगी। टीम के सदस्य शहर के विभिन्न क्षेत्रों में बिना पूर्व सूचना के पहुंचकर यह देखेंगे कि नागरिक इस दिशा में कितने सजग हैं। सुबह, दोपहर और शाम के समय आने वाले कचरा वाहनों की भी निगरानी होगी। यह परखा जाएगा कि वाहन आने पर नागरिक अलग-अलग कचरा सौंपते हैं या नहीं। साथ ही, नागरिकों से इस व्यवस्था को लेकर फीडबैक भी लिया जा सकता है।
छह श्रेणियों में करें कचरे का विभाजन
नागरिकों को केवल गीले और सूखे कचरे तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि गीला, सूखा, प्लास्टिक, इलेक्ट्रॉनिक, सेनेटरी वेस्ट (पैड और डायपर) तथा कांच/ट्यूबलाइट जैसे कचरे को अलग-अलग करना आवश्यक है। सर्वे टीम गारबेज ट्रांसफर स्टेशनों (GTS) का भी निरीक्षण करेगी, जहां यह देखा जाएगा कि स्रोत स्तर पर पृथकीकरण से कार्य में कितनी सुविधा मिल रही है। सही तरीके से पृथकीकरण और आगे की प्रक्रिया शहर को पूरे अंक दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
जागरूकता ही सफलता की कुंजी
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने नागरिकों से अपील की है कि वे जिम्मेदारी निभाते हुए घर से निकलने वाले कचरे को अलग-अलग कर ही कचरा वाहन को दें। उन्होंने कहा कि यदि शहरवासी सजग और जागरूक रहेंगे, तो इंदौर के लिए एक बार फिर शीर्ष स्थान हासिल करना आसान होगा।
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