इंदौर के लवकुश चौराहे पर बने शहर के पहले डबल डेकर ब्रिज की एक भुजा गुरुवार को वाहनों की आवाजाही के लिए खोल दी गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक सादे समारोह में फीता काटकर इसका लोकार्पण किया। मूल रूप से इसका उद्घाटन बुधवार को प्रस्तावित था, लेकिन मेट्रो रेल कॉरपोरेशन से आवश्यक अनुमति नहीं मिलने के कारण कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया था।
गुरुवार को अलीराजपुर रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री कुछ समय के लिए लवकुश चौराहे पहुंचे और ब्रिज का उद्घाटन किया। उद्घाटन के तुरंत बाद बैरिकेड हटाकर अरविंदो अस्पताल से बाणगंगा की ओर जाने वाली ब्रिज की भुजा को ट्रैफिक के लिए खोल दिया गया। ब्रिज शुरू होते ही नीचे स्थित सर्विस रोड पर वाहनों का दबाव कम होता नजर आया।
इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करीब 175 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। यह इंदौर का पहला डबल डेकर ब्रिज है, जिसके निचले स्तर पर सुपर कॉरिडोर की ओर जाने वाला मार्ग है, जबकि मध्य भाग में मेट्रो रेल ट्रैक बनाया गया है। लगभग 70 फीट ऊंचे इस ब्रिज पर पहली बार वाहन चलाने का अनुभव वाहन चालकों के लिए खास रहा।
अधिक ऊंचाई के कारण ब्रिज की कुल लंबाई 1,554 मीटर रखी गई है। छह लेन वाले इस पुल के निर्माण में करीब तीन वर्ष लगे। अनुमान है कि इसके शुरू होने से प्रतिदिन एक लाख से अधिक वाहनों को सुगम आवागमन की सुविधा मिलेगी। इंदौर-उज्जैन मार्ग पर स्थित इस ब्रिज के बाद उज्जैन रोड को आठ लेन तक विस्तारित करने की योजना भी है।
ब्रिज के निर्माण से पहले लवकुश चौराहा इंदौर के सबसे संवेदनशील 10 ब्लैक स्पॉट में शामिल था। यहां भारी वाहनों और दोपहिया वाहनों की लगातार आवाजाही के कारण सड़क दुर्घटनाएं आम थीं और कई लोगों की जान भी जा चुकी थी। करीब एक वर्ष पहले सुपर कॉरिडोर की ओर जाने वाला फ्लाईओवर शुरू किया गया था, जबकि अब इस डबल डेकर ब्रिज के खुलने से यातायात व्यवस्था और अधिक सुगम होने की उम्मीद है।
आगामी सिंहस्थ महापर्व के दौरान उज्जैन जाने वाले वाहनों के लिए भी यह ब्रिज महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे इंदौर-उज्जैन मार्ग पर यातायात का दबाव कम होगा और यात्रा पहले की तुलना में अधिक तेज एवं सुरक्षित हो सकेगी।
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