इंदौर। मेदांता सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, इंदौर के कार्डियक सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. विनीत पांडे, एनेस्थेटिस्ट डॉ. मनोज गुप्ता एवं उनकी विशेषज्ञ टीम ने एक अत्यंत दुर्लभ और जटिल कार्डियक सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए 75 वर्षीय मरीज के हृदय से लगभग 180 ग्राम वजनी ट्यूमर निकालकर उन्हें नया जीवन दिया। मरीज का उपचार आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत किया गया। सफल सर्जरी और बेहतर पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल के चलते मरीज ऑपरेशन के पांचवें दिन स्वस्थ होकर घर लौट गया।
हरदा जिले के भुवनखेड़ी गांव निवासी जय सिंह चंदेल (75 वर्ष) पिछले करीब 15 दिनों से सांस फूलने, सीने में दर्द और बार-बार चक्कर आने जैसी समस्याओं से परेशान थे। शुरुआत में उन्होंने इसे बढ़ती उम्र और सामान्य कमजोरी का असर समझा, लेकिन धीरे-धीरे उनकी स्थिति बिगड़ने लगी। सांस लेने में तकलीफ इतनी बढ़ गई कि रोजमर्रा के सामान्य कार्य करना भी कठिन हो गया। इसके बाद वे मेदांता सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, इंदौर पहुंचे, जहां उनका उपचार आयुष्मान भारत योजना के तहत शुरू किया गया।
मेदांता सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, इंदौर के कार्डियक सर्जरी विभाग के डायरेक्टर डॉ. विनीत पांडे ने बताया कि प्रारंभिक जांच के बाद मरीज की इकोकार्डियोग्राफी सहित आवश्यक हृदय संबंधी परीक्षण किए गए। जांच में पता चला कि उनके हृदय के दाहिने हिस्से में राइट एट्रियल मायक्सोमा (Right Atrial Myxoma) नाम का एक दुर्लभ कार्डियक ट्यूमर विकसित हो गया है। यह ट्यूमर रक्त प्रवाह में बाधा उत्पन्न कर रहा था, जिसके कारण मरीज में राइट हार्ट फेल्योर के शुरुआती लक्षण दिखाई देने लगे थे। उनके पैरों में सूजन थी, लिवर प्रभावित होने लगा था तथा लिवर फंक्शन टेस्ट में भी असामान्य बदलाव सामने आए थे। हालांकि राहत की बात यह रही कि कोरोनरी एंजियोग्राफी में हृदय की धमनियां पूरी तरह सामान्य पाई गईं।
सभी जांच रिपोर्ट और मरीज की गंभीर स्थिति का विस्तृत मूल्यांकन करने के बाद विशेषज्ञ टीम ने तत्काल सर्जरी का निर्णय लिया। ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने अत्यंत सावधानी के साथ ट्यूमर को उसकी जड़ सहित सफलतापूर्वक निकाल दिया। सर्जरी के दौरान ट्यूमर का वास्तविक आकार 9.5 × 5.5 सेंटीमीटर तथा वजन लगभग 180 ग्राम पाया गया। डॉक्टरों के अनुसार, हृदय में बनने वाले इस प्रकार के ट्यूमर अत्यंत दुर्लभ होते हैं और समय पर उपचार नहीं मिलने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकते हैं।
सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में लगातार सुधार होता गया। चार से पांच दिनों तक स्वास्थ्य मानकों की नियमित निगरानी के बाद उन्हें पांचवें दिन अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। वर्तमान में मरीज पूरी तरह स्वस्थ हैं और नियमित फॉलोअप के साथ सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं।
डॉ. विनीत पांडे ने कहा, “राइट एट्रियल मायक्सोमा हृदय में बनने वाला एक दुर्लभ ट्यूमर है। इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके शुरुआती लक्षण सामान्य बीमारियों जैसे सांस फूलना, अत्यधिक थकान, सीने में असहजता या चक्कर आने जैसे होते हैं। इसी कारण कई मरीज समय पर विशेषज्ञ चिकित्सक तक नहीं पहुंच पाते। यदि ऐसे लक्षण लगातार बने रहें तो इकोकार्डियोग्राफी जैसी जांच से बीमारी की समय रहते पहचान की जा सकती है। समय पर सर्जरी होने पर मरीज पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी सकता है। सर्जरी के बाद नियमित फॉलोअप और समय-समय पर जांच भी आवश्यक है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की जटिलता से बचा जा सके।”
मेदांता सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, इंदौर के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. संजय गीद ने कहा, “इस मरीज का उपचार आयुष्मान भारत योजना के तहत किया गया। सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों को जटिल और अत्याधुनिक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना संभव हो रहा है। मेदांता में विभिन्न विशेषज्ञ विभाग समन्वित रूप से कार्य करते हैं, जिससे दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण मामलों का भी सफल उपचार किया जा सकता है। अनुभवी चिकित्सकों, आधुनिक तकनीक और समय पर लिए गए चिकित्सकीय निर्णयों के कारण ऐसे मामलों में उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त हो रहे हैं। हमारा उद्देश्य केवल बीमारी का इलाज करना नहीं, बल्कि मरीज को सुरक्षित उपचार और बेहतर रिकवरी के साथ सामान्य जीवन में वापस लाना है।”
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