इंदौर स्थित मेदांता सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल ने हाल ही में एक अत्याधुनिक AI-आधारित डेंटल स्क्रीनिंग रोबोट ‘स्कैनओ एअर’ का शुभारंभ किया है। यह नि:शुल्क डिजिटल प्लेटफॉर्म मुंह की सेहत की जांच को आसान, तेज और सभी के लिए सुलभ बनाने के मकसद से तैयार किया गया है। इसका उद्घाटन हॉस्पिटल के कैंसर केयर विभाग के डायरेक्टर डॉ. अमेय बिहानी के हाथों हुआ।
केवल कुछ सेकंड में पूरी स्कैनिंग
यह मशीन एक स्वचालित कियोस्क की तरह काम करती है — मरीज को बस इसके सामने खड़ा होना होता है, और AI तकनीक महज 10-12 सेकंड में पूरे मुंह और दांतों की स्कैनिंग कर लेती है। खास बात यह है कि इसमें एक्स-रे या किसी भी तरह की रेडिएशन का उपयोग नहीं होता। स्कैन के तुरंत बाद एक डिजिटल रिपोर्ट तैयार हो जाती है, जो मरीज को उसके फोन या व्हाट्सएप पर भेजी जा सकती है।
40 से ज्यादा समस्याओं की पहचान
यह AI सिस्टम दांतों और मसूड़ों से जुड़ी 40 से अधिक स्थितियों को पहचान सकता है — जैसे कैविटी, मसूड़ों की समस्याएं और मुंह में दिखने वाले अन्य असामान्य बदलाव। निर्माता कंपनी का दावा है कि क्लीनिकल परीक्षणों में इसकी सटीकता 96% से ऊपर पाई गई है।
ओरल कैंसर की जल्द पहचान में सहायक
डॉ. बिहानी के अनुसार, ओरल कैंसर के इलाज में समय पर पहचान बेहद अहम होती है, लेकिन अक्सर मरीज मुंह में मौजूद छालों या गांठों को नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसे में यह तकनीक नियमित जांच के दौरान संभावित खतरों को पहले ही पकड़ने में मदद कर सकती है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है, बल्कि शुरुआती जांच के बाद जरूरतमंद मरीजों को सही विशेषज्ञ तक पहुंचाने का एक जरिया है।
हॉस्पिटल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. संजय गीद ने बताया कि यह पहल मरीजों को बेहतर और सुविधाजनक स्वास्थ्य सेवाएं देने के हॉस्पिटल के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में इस तकनीक का इस्तेमाल हेल्थ कैंप और जन-जागरूकता कार्यक्रमों में भी किया जा सकेगा।
तकनीक और प्रमाणन
स्कैनओ एअर को गूगल के एक्सेलेरेशन प्रोग्राम का सहयोग प्राप्त है और इसमें Tooth AI तथा TissueAI जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। कंपनी के मुताबिक इसे ISO 13485, ISO 9001 और CE Mark जैसे अंतरराष्ट्रीय प्रमाणपत्र भी मिल चुके हैं।
कुल मिलाकर, मेदांता इंदौर की यह पहल शहर में ओरल हेल्थ स्क्रीनिंग को नियमित आदत बनाने की दिशा में एक अहम प्रयास मानी जा रही है, ताकि लोग समय रहते जांच कराएं और जरूरत पड़ने पर सही इलाज पा सकें।
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