मध्य प्रदेश टैक्स कंसलटेंट एसोसिएशन द्वारा जीएसटी ट्रिब्यूनल में अपील दाखिल करने की प्रक्रिया और उसकी तैयारी को लेकर एक विशेष सेमिनार एवं मूट ट्रिब्यूनल का आयोजन किया गया। इस पहल का उद्देश्य कर सलाहकारों और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को ट्रिब्यूनल की कार्यप्रणाली का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना था।
संस्था के अध्यक्ष एडवोकेट सीए सुमित नीमा ने कहा कि जीएसटी कानून लागू होने के लगभग आठ वर्ष बाद ट्रिब्यूनल की स्थापना हुई है, जिससे इसके शुरू होते ही करीब चार लाख से अधिक अपीलों का दबाव आने की संभावना है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों में कई मामलों में अपील दाखिल नहीं हो सकी, जिसके चलते विवादित प्रकरणों की संख्या बढ़ गई है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि पुराने मामलों के समाधान के लिए डिस्प्यूट रिजोल्यूशन स्कीम लागू की जाए, ताकि 20–30 प्रतिशत राशि जमा कर मामलों का निपटारा किया जा सके।
सेमिनार में सीए एस.एन. गोयल ने अपील की समय-सीमा पर जानकारी देते हुए बताया कि जिन मामलों में प्रथम अपील का आदेश 1 अप्रैल 2026 से पहले मिला है, उनकी अपील 30 जून 2026 तक दाखिल करनी होगी। वहीं, 1 अप्रैल 2026 के बाद प्राप्त आदेशों के खिलाफ अपील 3 माह के भीतर करना अनिवार्य है। विलंब की स्थिति में अधिकतम 3 माह की अतिरिक्त अवधि उचित कारणों के साथ आवेदन देकर प्राप्त की जा सकती है।
सीए कीर्ति जोशी ने अपील प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अपील फॉर्म GST APL-05 में जीएसटीएटी पोर्टल पर ऑनलाइन दाखिल की जाती है। इसके लिए विवादित कर राशि का 20 प्रतिशत अग्रिम जमा करना आवश्यक है। साथ ही आदेश की प्रमाणित प्रति 7 दिनों के भीतर हार्ड कॉपी में जमा करना अनिवार्य है, अन्यथा अपील की तिथि मान्य नहीं होगी।
उन्होंने बताया कि अपील दाखिल करने के लिए न्यूनतम 5,000 रुपये शुल्क देना होगा, जबकि प्रत्येक 1 लाख रुपये की कर, ब्याज या दंड राशि पर 1,000 रुपये अतिरिक्त शुल्क लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा 25,000 रुपये निर्धारित है। उन्होंने यह भी कहा कि अन्य कर ट्रिब्यूनलों की तुलना में यह शुल्क अधिक है, जिससे न्याय प्राप्त करना अपेक्षाकृत महंगा हो गया है।

तकनीकी आवश्यकताओं पर जानकारी देते हुए बताया गया कि दस्तावेज A4 साइज पेपर पर निर्धारित मार्जिन और डबल स्पेसिंग के साथ तैयार किए जाएं। अपील केवल अंग्रेजी भाषा में स्वीकार की जाएगी और अन्य भाषाओं के दस्तावेजों का प्रमाणित अंग्रेजी अनुवाद संलग्न करना अनिवार्य होगा।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण जीएसटी मूट ट्रिब्यूनल रहा, जो संभवतः मध्य प्रदेश में अपनी तरह का पहला आयोजन था। इसमें वास्तविक ट्रिब्यूनल जैसा माहौल बनाकर लंबित मामलों पर बहस कराई गई। करीब 10 चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और कर सलाहकारों ने 6 प्रमुख विवादित मुद्दों पर अपनी कानूनी समझ, शोध और प्रस्तुति कौशल का प्रदर्शन किया।
एक सत्र के दौरान एआई के उपयोग से जुड़ी एक महत्वपूर्ण सीख भी सामने आई, जहां एक प्रतिभागी द्वारा तैयार ड्राफ्ट में एआई ने गलत केस का उल्लेख कर दिया, जिससे पूरा तर्क प्रभावित हुआ। इस पर जजों ने स्पष्ट किया कि किसी भी केस का हवाला देने से पहले उसका गहन अध्ययन करना अत्यंत आवश्यक है।
करदाता पक्ष की ओर से सीए उमेश गोयल, सीए नवीन खंडेलवाल, सीए अंकित करणपुरिया, सीए प्रखर गोयल और अंकुर अग्रवाल ने पैरवी की, जबकि विभाग की ओर से सीए शैलेन्द्र पोरवाल, सीए दिलीप राठौर और सीए अरविंद चावला ने पक्ष रखा।
वरिष्ठ सीए पी.डी. नागर और सीए आशीष गोयल ने न्यायाधीश की भूमिका निभाते हुए निर्णय सुनाए और प्रतिभागियों को ट्रिब्यूनल में प्रस्तुतिकरण के दौरान ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण बिंदुओं से अवगत कराया।
यह कार्यक्रम प्रतिभागियों के लिए जीएसटी ट्रिब्यूनल की कार्यप्रणाली को समझने और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार होने का एक प्रभावी मंच साबित हुआ।
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